शिमला।
16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को लेकर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक राजनीतिक टकराव में बदल गई। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भाजपा पर प्रदेश हितों से पीछे हटने का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष ने बैठक के तौर-तरीकों पर सवाल उठाते हुए बीच में ही वॉकआउट कर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान खत्म होने की आशंका हिमाचल की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी जनता के सामने अपना स्पष्ट रुख रखने से बच रही है और केंद्र सरकार के फैसले पर चुप्पी साधे हुए है।
सुक्खू ने दावा किया कि अन्य राजनीतिक दलों—सीपीआई(एम), आम आदमी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी—ने राज्य सरकार के साथ मिलकर अनुदान बहाली के लिए प्रधानमंत्री से संयुक्त प्रतिनिधिमंडल भेजने का समर्थन किया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, राजस्व घाटा अनुदान राज्यों के लिए संवैधानिक प्रावधान है, जो दशकों से हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों की वित्तीय जरूरतों को संतुलित करता आया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार सीमित संसाधनों के बावजूद वित्तीय अनुशासन के साथ प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है।
बैठक में मौजूद संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान और कांग्रेस नेता कुलदीप सिंह राठौर ने भाजपा के वॉकआउट को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह मुद्दा राजनीति से ऊपर उठकर हल करने की जरूरत है।
दूसरी ओर भाजपा ने बैठक की प्रक्रिया और प्रस्तुत आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं, जिससे साफ है कि राजस्व घाटा अनुदान को लेकर प्रदेश की सियासत और तेज होने वाली है।