16 राजकीय महाविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम लागू, बीओएटी-एनआर के साथ हुआ समझौता
शिमला,
अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम्स (एईडीपी) को शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रदेश के 16 राजकीय महाविद्यालयों में लागू करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने बोर्ड ऑफ अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग (उत्तरी क्षेत्र), कानपुर (बीओएटी-एनआर) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की उपस्थिति में बीओएटी-एनआर के निदेशक विवेक कुमार और संबंधित 16 महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य कक्षा में दी जाने वाली शिक्षा और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच की दूरी को कम करना है। एईडीपी के माध्यम से विद्यार्थियों को मान्यता प्राप्त स्नातक डिग्री के साथ वास्तविक कार्यस्थल का व्यावहारिक अनुभव भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर विशेष ध्यान दे रही है।
छह महीने की अनिवार्य अप्रेंटिसशिप
एईडीपी के तहत विद्यार्थी बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं एवं बीमा (BFSI), रिटेल ऑपरेशंस मैनेजमेंट तथा लॉजिस्टिक्स जैसे उद्योग-केंद्रित डिग्री कार्यक्रमों में अध्ययन करेंगे। इन पाठ्यक्रमों में शैक्षणिक अध्ययन के साथ कम से कम छह महीने की अनिवार्य अप्रेंटिसशिप शामिल होगी। विद्यार्थियों को प्रतिमाह न्यूनतम 10,900 रुपये का सुनिश्चित स्टाइपेंड भी प्रदान किया जाएगा।
इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ वास्तविक कार्यस्थल का अनुभव हासिल करने और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप व्यावहारिक कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा।
16 महाविद्यालयों में 685 विद्यार्थियों ने लिया प्रवेश
शिक्षा मंत्री ने बताया कि एईडीपी के तहत पांच पाठ्यक्रमों को लागू करने की मंजूरी दी गई है। पहले चरण में 16 राजकीय महाविद्यालयों में तीन कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। इनमें बी.कॉम. बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं एवं बीमा, बी.कॉम. रिटेल ऑपरेशंस मैनेजमेंट और बी.कॉम. लॉजिस्टिक्स शामिल हैं।
बी.कॉम. बीएफएसआई का संचालन 11 महाविद्यालयों, बी.कॉम. रिटेल ऑपरेशंस मैनेजमेंट का दो महाविद्यालयों तथा बी.कॉम. लॉजिस्टिक्स का तीन महाविद्यालयों में किया जा रहा है। कार्यक्रम के पहले वर्ष में इन तीनों पाठ्यक्रमों में कुल 685 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है।
ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
रोहित ठाकुर ने कहा कि बीओएटी-एनआर के साथ हुआ समझौता उद्योगों के साथ संबंधों को मजबूत करने और विद्यार्थियों के लिए अप्रेंटिसशिप के अवसर उपलब्ध करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसका विशेष लाभ ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों को मिलेगा। उन्हें कार्यस्थल का अनुभव, उद्योग आधारित कौशल और बेहतर रोजगार संभावनाएं प्राप्त होंगी।
उन्होंने कहा कि एईडीपी को महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, बीओएटी-एनआर और सीआरआईएसपी के सहयोग से उद्योग संपर्क, अप्रेंटिसशिप, प्रशिक्षण और प्लेसमेंट सहायता के लिए संचालित किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में इन कार्यक्रमों से और अधिक विद्यार्थियों को जोड़ा जाएगा।
बीए और बीएससी में भी अप्रेंटिसशिप आधारित कार्यक्रमों की संभावना
शिक्षा मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बाद देश का तीसरा राज्य है जहां इस तरह के अप्रेंटिसशिप आधारित डिग्री कार्यक्रम लागू किए गए हैं। विद्यार्थियों से मिल रही उत्साहजनक प्रतिक्रिया को देखते हुए आने वाले वर्षों में एईडीपी का विस्तार और अधिक महाविद्यालयों तक किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को कौशल आधारित शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध करवाने के लिए बीए और बीएससी जैसे अन्य स्नातक पाठ्यक्रमों में भी अप्रेंटिसशिप आधारित कार्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा।
25 और महाविद्यालयों तक बढ़ेंगे बी.वोक कार्यक्रम
रोहित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के 21 राजकीय महाविद्यालयों में रिटेल मैनेजमेंट तथा टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी में बी.वोक कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में बेहतर प्लेसमेंट परिणामों को देखते हुए सरकार ने इनके विस्तार का निर्णय लिया है। अब इन कार्यक्रमों को 25 और महाविद्यालयों तक पहुंचाने की योजना है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में रोजगार के अवसर मिले हैं, जो कौशल आधारित उच्च शिक्षा की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाता है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधार कर रही है। इनका उद्देश्य शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार, कौशल आधारित शिक्षा को मजबूत करना और विद्यार्थियों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध करवाना है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से हिमाचल प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में मॉडल राज्य बनाने के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।
शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह समझौता ज्ञापन विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव, उद्योग-केंद्रित कौशल और रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा क्षेत्र में गुणात्मक सुधार लाने और विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
इस अवसर पर शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न महाविद्यालयों के प्रधानाचार्य तथा बीओएटी-एनआर के पदाधिकारी उपस्थित रहे।