चिट्टे के खिलाफ हिमाचल सरकार का बड़ा अभियान, 5,642 NDPS केस दर्ज और 8,250 से अधिक गिरफ्तार

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91.24 करोड़ रुपये की संपत्तियों से जुड़े 115 मामलों में कार्रवाई, तस्करों की आर्थिक ताकत पर भी प्रहार

शिमला,

हिमाचल प्रदेश में चिट्टा और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ राज्य सरकार ने कार्रवाई तेज करते हुए नशा तस्करों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार की रणनीति का फोकस केवल नशा तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके आपराधिक नेटवर्क को तोड़ने, अवैध कमाई और संपत्तियों पर कार्रवाई करने तथा नशे की चपेट में आए लोगों को उपचार और पुनर्वास उपलब्ध करवाने पर भी है।

सरकार के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में एनडीपीएस एक्ट के तहत 5,642 मामले दर्ज किए गए और 8,250 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। नशा तस्करी में संलिप्त पाए गए सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। कुल 139 सरकारी कर्मचारी कार्रवाई के दायरे में आए, जिनमें राज्य सरकार के 15 कर्मचारी और पुलिस विभाग के 22 कर्मियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है।

नशे के खिलाफ कानून को बनाया गया और प्रभावी

नशे के खिलाफ अभियान को कानूनी तौर पर मजबूत करने के लिए मार्च 2025 में हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने दो महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए। इनमें हिमाचल प्रदेश ड्रग्स एंड कंट्रोल्ड सब्सटेंसेज विधेयक, 2025 और हिमाचल प्रदेश ऑर्गेनाइज्ड क्राइम्स (प्रिवेंशन एंड कंट्रोल) विधेयक, 2025 शामिल हैं।

पहले विधेयक का उद्देश्य मादक पदार्थों की रोकथाम, आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई तथा उपचार और पुनर्वास व्यवस्था को मजबूत करना है। वहीं, दूसरा विधेयक संगठित आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाने पर केंद्रित है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि नशा तस्करी में शामिल किसी व्यक्ति को उसके राजनीतिक, आर्थिक या सामाजिक प्रभाव के आधार पर संरक्षण नहीं दिया जाएगा। पुलिस और प्रवर्तन एजेंसियां बार-बार अपराध में शामिल आरोपियों, संगठित सप्लाई नेटवर्क और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों पर विशेष निगरानी रख रही हैं। पंचायत स्तर तक संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और स्थानीय निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

तस्करों की संपत्तियों पर भी कसा शिकंजा

सरकार ने नशा तस्करी से अर्जित अवैध संपत्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई को अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। पीआईटी-एनडीपीएस कानून के तहत दिसंबर 2025 तक 46 बड़े नशा तस्करों को निरुद्ध किए जाने और करीब 46 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियां जब्त किए जाने की जानकारी दी गई है।

वहीं, वर्ष 2024 से 2026 के दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों और पुलिस जिलों में 115 मामलों में करीब 91.24 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां फ्रीज की गईं।

इनमें पुलिस जिला नूरपुर में 14 मामलों में 22.28 करोड़ रुपये, सोलन में 15 मामलों में 17.86 करोड़ रुपये, शिमला में 16 मामलों में 12.61 करोड़ रुपये, ऊना में 2 मामलों में 10.98 करोड़ रुपये, सिरमौर में 7 मामलों में 8.84 करोड़ रुपये और कांगड़ा में 8 मामलों में 6.24 करोड़ रुपये की संपत्तियां शामिल हैं।

इसके अलावा मंडी में 8 मामलों में 3.62 करोड़ रुपये, पुलिस जिला बद्दी में 21 मामलों में 5.12 करोड़ रुपये, बिलासपुर में 19 मामलों में 2.19 करोड़ रुपये, पुलिस जिला देहरा में 3 मामलों में 89.65 लाख रुपये तथा कुल्लू में 2 मामलों में 19.02 लाख रुपये की संपत्तियां फ्रीज की गई हैं।

वर्षवार आंकड़ों के अनुसार, 2024 में 12 मामलों में 25.43 करोड़ रुपये, 2025 में 27 मामलों में 23.98 करोड़ रुपये और 2026 में 76 मामलों में 41.42 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों पर कार्रवाई की गई।

सूचना देने वालों को 10 लाख तक इनाम

सरकार ने नशे के खिलाफ अभियान में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने 1 दिसंबर 2025 को धर्मशाला में चिट्टा विरोधी जागरूकता वॉकाथॉन के दौरान चिट्टा सूचना पुरस्कार योजना शुरू की थी।

इस योजना के तहत नशा तस्करी से जुड़ी विश्वसनीय सूचना देने वालों को 10 हजार रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक का नकद पुरस्कार दिया जा सकता है। सूचना 112 आपातकालीन हेल्पलाइन के माध्यम से दी जा सकती है और सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखने पर जोर दिया गया है।

पुलिस और स्थानीय समुदायों के बीच समन्वय मजबूत करने के लिए एंटी-चिट्टा वालंटियर टीम गठित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

युवाओं को खेल और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर

सरकार का मानना है कि नशे की समस्या से निपटने के लिए सिर्फ कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। युवाओं को खेल, रचनात्मक गतिविधियों और स्वस्थ जीवनशैली से जोड़ना भी जरूरी है।

इसी उद्देश्य से ‘खेलो हिमाचल-चिट्टा मुक्त हिमाचल’ पहल के जरिए युवाओं को खेलों और शारीरिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। शिमला, धर्मशाला, हमीरपुर, ऊना और बिलासपुर में जागरूकता वॉकाथॉन आयोजित कर नशे के खिलाफ जनचेतना बढ़ाने का प्रयास भी किया गया है।

इन अभियानों के जरिए परिवारों, शिक्षण संस्थानों और स्थानीय समुदायों को नशे के खतरों के प्रति जागरूक करने और युवाओं को नशे से दूर रखने का संदेश दिया जा रहा है।

उपचार और पुनर्वास पर भी सरकार का फोकस

नशे की समस्या से प्रभावित लोगों को उपचार और सम्मानजनक जीवन में वापस लाना भी सरकार की रणनीति का अहम हिस्सा है। शिमला जिले के मशोबरा स्थित नव-जीवन महिला नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र में महिलाओं के लिए चिकित्सा उपचार, मनोवैज्ञानिक परामर्श, आवास और पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

इसके अलावा डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा में एक और नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र स्थापित करने की योजना है। सिरमौर जिले के कोटला बड़ोग में आधुनिक सुविधाओं से युक्त 100 बिस्तरों वाला नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र भी विकसित किया जा रहा है।

सरकार ने नशामुक्ति, रोकथाम और पुनर्वास से जुड़े प्रयासों को समन्वित रूप से आगे बढ़ाने के लिए नशामुक्ति रोकथाम एवं पुनर्वास बोर्ड का गठन भी किया है। जिला स्तर पर उपचार, परामर्श और पुनर्वास सेवाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है।

सरकार की रणनीति में एक ओर जहां नशा तस्करों और संगठित नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई को प्राथमिकता दी जा रही है, वहीं नशे की गिरफ्त में आए लोगों को उपचार, परिवार का सहयोग और समाज में दोबारा सम्मान के साथ जीवन शुरू करने का अवसर देने पर भी समान रूप से ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।