शिमला:
हिमाचल प्रदेश के वित्त वर्ष 2026-27 के वार्षिक बजट को लेकर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में विधायक प्राथमिकता बैठक आयोजित की गई। बैठक के पहले दिन के दूसरे सत्र में सोलन, चंबा, बिलासपुर, लाहौल-स्पीति और किन्नौर जिलों के विधायकों के साथ विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान विधायकों ने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों से जुड़ी प्रमुख विकासात्मक आवश्यकताओं को सरकार के समक्ष रखा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सुनियोजित ढंग से संसाधनों का उपयोग कर विकास को गति दे रही है। उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2025-26 में आरआईडीएफ योजना के तहत 758.81 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। उन्होंने विभागों को निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं को अन्य मदों से स्वीकृति मिल चुकी है, उनकी डीपीआर को नाबार्ड से समय रहते वापस लिया जाए ताकि वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता बनी रहे।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश ने भारी प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है, जिससे सड़क, पुल और अन्य आधारभूत ढांचे को व्यापक नुकसान हुआ। सरकार ने अपने सीमित संसाधनों के बावजूद प्रभावित परिवारों को राहत और पुनर्वास सहायता उपलब्ध करवाई है और आगामी बजट में आपदा प्रभावित क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यटन, ऊर्जा और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों को विकास की रीढ़ माना है। स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए रोबोटिक सर्जरी, पैट स्कैन, एडवांस डायग्नोस्टिक लैब और अत्याधुनिक मेडिकल उपकरणों को चरणबद्ध तरीके से स्थापित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि चमियाणा अस्पताल और टांडा मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी शुरू हो चुकी है और जल्द ही यह सुविधा प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों तक विस्तारित की जाएगी। इसके साथ ही, आने वाले तीन महीनों में सभी मेडिकल कॉलेजों में थ्री-टेस्ला एमआरआई मशीनें स्थापित की जाएंगी। सरकार अगले दो वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में लगभग 3000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
शिक्षा के क्षेत्र में बड़े सुधारों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 140 सीबीएसई स्कूल और चार राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल खोले जाएंगे। इसके अलावा, विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और समान अवसर देने के लिए आधुनिक डिजिटल शिक्षा और नवाचारों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि सरकार सुशासन को लेकर प्रतिबद्ध है और पिछले तीन वर्षों में 5.70 लाख म्यूटेशन मामलों का निपटारा किया गया है। 31 मार्च तक 80 प्रतिशत दुरुस्ती मामलों के समाधान का लक्ष्य रखा गया है।
बैठक में सोलन, चंबा, बिलासपुर और लाहौल-स्पीति जिलों के विधायकों ने सड़कों की मरम्मत, पुलों के निर्माण, स्वास्थ्य संस्थानों के सुदृढ़ीकरण, पर्यटन विकास, पेयजल योजनाओं और प्रशासनिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए। मुख्यमंत्री ने सभी सुझावों को गंभीरता से लेते हुए बजट में समुचित प्रावधान करने का आश्वासन दिया।
बैठक के समापन पर मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जबकि प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार ने बैठक की कार्यवाही का संचालन किया।