हिमाचल के शहर बन रहे एआई सक्षम स्मार्ट सिटी, तकनीक से बदल रही शासन व्यवस्था: गोकुल बुटेल

Himachal News

चंडीगढ़,

मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (सूचना प्रौद्योगिकी एवं नवाचार) गोकुल बुटेल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के शहरी क्षेत्र तेजी से एआई सक्षम स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित हो रहे हैं। उन्होंने यह बात चंडीगढ़ में आयोजित अर्बन इनोवेशन समिट को संबोधित करते हुए कही।

इस प्रतिष्ठित शिखर सम्मेलन का उद्घाटन गुलाब चंद कटारिया, जो पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक हैं, ने किया। उन्होंने गोकुल बुटेल का आभार व्यक्त करते हुए अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे हिमाचल प्रदेश के डेटा-ड्रिवन गवर्नेंस मॉडल का अध्ययन करें और इसे एक आदर्श मॉडल के रूप में अपनाएं।

अपने संबोधन में गोकुल बुटेल ने कहा कि आज के समय में नवाचार केवल विकल्प नहीं बल्कि शहरों और नागरिकों के विकास के लिए अनिवार्य आवश्यकता बन गया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल के शहरी केंद्र अब केवल पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि तकनीक के माध्यम से तेजी से स्मार्ट और आधुनिक शहरों में बदल रहे हैं।

उन्होंने बताया कि पिछले तीन-चार वर्षों में प्रदेश ने तकनीक के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। हिम सेवा पोर्टल के माध्यम से वर्तमान में 550 से अधिक नागरिक सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने स्टेट डेटा होस्टिंग पॉलिसी अधिसूचित की है। डेटा आधारित शासन प्रणाली के माध्यम से बेहतर विश्लेषण और सटीक नीति निर्धारण संभव हो पाया है।

गोकुल बुटेल ने हिम डेटा पोर्टल और एआई आधारित दस्तावेज सत्यापन प्रणाली के लाभों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पहले राजस्व और नगर निगम अधिकारियों को दस्तावेजों के सत्यापन में कई सप्ताह लग जाते थे, जबकि अब एआई आधारित प्रणाली रीयल-टाइम फीडबैक प्रदान कर रही है।

उन्होंने कहा कि हिमसोमसा, पंचायती राज और शहरी विकास विभागों में डिजिटल सुधारों तथा परिवार रजिस्टर प्रणाली के माध्यम से राज्य सरकार को हर वर्ष 60 करोड़ रुपये से अधिक की प्रत्यक्ष बचत हो रही है।

नवाचार के मानवीय पहलू पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने हिम परिवार योजना और माई डीड का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि माई डीड के माध्यम से हिमाचल प्रदेश पूरी तरह पेपरलेस संपत्ति पंजीकरण प्रणाली लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है और तहसील कार्यालय की सेवाएं सीधे नागरिकों के मोबाइल तक पहुंच गई हैं।

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