नई दिल्ली,
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों की टाइमलाइन को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ इस मामले पर विचार करेगी।
प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें 30 अप्रैल से पहले पंचायती राज चुनाव करवाने के निर्देश दिए गए थे। सरकार ने इसके खिलाफ सर्वोच्च अदालत में स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) दायर की है।
यह मामला “प्रधान सचिव बनाम डिक्कन कुमार ठाकुर” शीर्षक से सूचीबद्ध है। राज्य सरकार की ओर से मुख्य सचिव और प्रधान सचिव (पंचायती राज) याचिकाकर्ता हैं, जबकि जनहित याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता डिक्कन कुमार ठाकुर प्रतिवादी हैं। इसके अलावा प्रदेश के सभी 12 जिलों के उपायुक्त, जिला चुनाव अधिकारी होने के नाते पक्षकार बनाए गए हैं।
राज्य सरकार ने अपनी याचिका में दलील दी है कि हालिया आपदाओं और भारी बारिश के कारण कई क्षेत्रों में बहाली कार्य जारी है और आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू होने की स्थिति में चुनाव कराना व्यावहारिक नहीं है। सरकार का तर्क है कि संसद द्वारा बनाया गया आपदा प्रबंधन कानून, राज्य के पंचायती राज कानून पर प्राथमिकता रखता है।
सरकार ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट द्वारा तय की गई समयसीमा में चुनावी प्रक्रिया पूरी करना संभव नहीं है और इस पहलू पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया।
अब पंचायत चुनावों की तारीख और प्रक्रिया को लेकर अंतिम स्थिति सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।