आईजीएमसी में दुर्लभ मामला: गले से जीवित जोंक निकालकर डॉक्टरों ने बचाई 55 वर्षीय मरीज की जान

Himachal News

शिमला।
इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला में एक बेहद दुर्लभ और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां डॉक्टरों ने समय रहते एक मरीज के गले से जीवित जोंक (Leech) निकालकर उसकी जान बचा ली। यह मामला जिला सिरमौर के पच्छाद उपमंडल के गांव कंगर-धारयार निवासी 55 वर्षीय सुरेश से जुड़ा है।

मरीज को पिछले करीब 15 दिनों से गले में कुछ फंसा होने का अहसास, आवाज में बदलाव और लगातार असहजता की शिकायत थी। प्रारंभिक जांच के लिए उन्हें एमएमयू सोलन ले जाया गया, जहां डायरेक्ट लैरिंगोस्कोपी के दौरान डॉक्टरों को गले में काले रंग की हिलती हुई वस्तु दिखाई दी।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मरीज को तुरंत आईजीएमसी शिमला रेफर किया गया। यहां ईएनटी विभाग की टीम ने बिना देरी किए इमरजेंसी फॉरेन बॉडी ऑपरेशन (Emergency FOB) किया। ऑपरेशन के दौरान मरीज के गले से जीवित काली जोंक को सफलतापूर्वक निकाल लिया गया।

इस जटिल ऑपरेशन का नेतृत्व डॉ. डिंपल के. भगलानी (सहायक प्रोफेसर, ईएनटी) ने किया। टीम में
डॉ. राघव निरुला (सीनियर रेजिडेंट),
डॉ. मयूर बग्गा (जूनियर रेजिडेंट),
डॉ. निशांत और डॉ. कुमार सौरव (जेआर) शामिल रहे।
तकनीकी सहयोग सुभाष बाली और श्रीमती अर्चना द्वारा प्रदान किया गया।

डॉक्टरों के अनुसार, यदि समय रहते यह जोंक नहीं निकाली जाती तो मरीज को सांस लेने में गंभीर दिक्कत, संक्रमण या जान का खतरा भी हो सकता था। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत स्थिर और खतरे से बाहर बताई जा रही है।

चिकित्सकों ने विशेष तौर पर ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को प्राकृतिक जल स्रोतों के उपयोग के दौरान सतर्कता बरतने की सलाह दी है, ताकि इस तरह की दुर्लभ लेकिन गंभीर घटनाओं से बचा जा सके।

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