शिमला,
प्रदेश के आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा शिमला में आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के तहत क्षेत्रीय कार्मिकों के लिए दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार आयोजित की जा रही है।
कार्यशाला का शुभारंभ आर्थिक सलाहकार डॉ. विनोद राणा ने किया। उन्होंने कहा कि सांख्यिकी साक्ष्य-आधारित शासन और प्रभावी विकास योजना के लिए एक महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि सटीक और विश्वसनीय आंकड़ों का संकलन ही श्रम बाजार से जुड़े महत्वपूर्ण संकेतकों के निर्माण की आधारशिला है।
डॉ. राणा ने क्षेत्रीय कार्मिकों को डेटा संग्रह के दौरान विशेष सावधानी बरतने, आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने तथा कंप्यूटर असिस्टेड पर्सनल इंटरव्यूइंग (CAPI) प्रणाली के माध्यम से समयबद्ध और प्रभावी डेटा संकलन सुनिश्चित करने पर बल दिया।
उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण के तहत राज्य नमूने में लगभग 180 ग्रामीण ब्लॉकों और 120 शहरी ब्लॉकों से आंकड़े एकत्रित किए जाएंगे। इसके अलावा केंद्र के नमूने में भी लगभग इतने ही ब्लॉकों को शामिल किया जाएगा।
इस कार्यशाला का उद्देश्य राज्य में आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के प्रभावी क्रियान्वयन को मजबूत बनाना और जिला स्तर पर श्रम बाजार के प्रमुख संकेतकों जैसे श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR), श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) और बेरोजगारी दर (UR) के विश्वसनीय अनुमान तैयार करना है।
उन्होंने प्रदेश के नागरिकों और जनप्रतिनिधियों से भी अपील की कि सर्वेक्षण के दौरान क्षेत्रीय अन्वेषकों को पूरा सहयोग दें और सही जानकारी उपलब्ध करवाएं। उन्होंने कहा कि विश्वसनीय आंकड़ों के आधार पर ही रोजगार सृजन और राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए प्रभावी नीतियां बनाई जा सकती हैं।
उन्होंने बताया कि आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण की शुरुआत अप्रैल 2017 में की गई थी, जो देश में रोजगार और बेरोजगारी से संबंधित आंकड़े उपलब्ध कराने वाला प्रमुख राष्ट्रीय सर्वेक्षण है।
कार्यशाला के दौरान क्षेत्रीय अन्वेषकों के लिए प्रशिक्षण सत्र आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय के अधिकारियों द्वारा संचालित किए गए।