शिमला,
प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने विभागीय समीक्षा बैठक में कई अहम निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार सीधे तौर पर जिला स्तर के उप-निदेशकों की जिम्मेदारी होगी और फील्ड विजिट के माध्यम से विद्यालयों की वास्तविक स्थिति की नियमित रिपोर्ट देनी होगी।
संसाधनों के परिणामोन्मुख उपयोग पर जोर
मंत्री ने समग्र शिक्षा के तहत जारी बजट को 31 मार्च 2026 तक पूरी तरह खर्च करने और उसका असर कक्षा स्तर पर दिखाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि धनराशि का उपयोग केवल औपचारिक न होकर सीखने के स्तर में सुधार के रूप में नजर आना चाहिए।
विलय स्कूलों के खाली भवन होंगे जनहित में उपयोग
विद्यालयों के विलय के बाद खाली पड़े भवनों को निष्क्रिय न छोड़ने के निर्देश देते हुए उन्होंने पंचायतों के साथ समन्वय कर इन्हें आंगनवाड़ी केंद्र, सामुदायिक भवन या अन्य सरकारी उपयोग में लाने को कहा। इससे सार्वजनिक संपत्तियों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।
विज्ञान-वाणिज्य संकाय का युक्तिकरण
राज्य के 1,970 स्कूलों में से 818 में विज्ञान और 799 में वाणिज्य संकाय संचालित होने की समीक्षा करते हुए उपलब्ध स्टाफ, लैब और पुस्तकालयों के साझा उपयोग पर बल दिया गया, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
बोर्ड परीक्षा में सख्ती: हर कक्ष में सीसीटीवी
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अंतर्गत होने वाली परीक्षाओं के लिए सभी परीक्षा कक्षों में लाइव मॉनिटरिंग सहित सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य किए गए हैं। संवेदनशील केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी और प्रधानाचार्य केंद्र समन्वयक के रूप में जिम्मेदार होंगे।
निजी स्कूलों को चेतावनी
सीबीएसई से जुड़े स्कूलों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को समय पर स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (SLC) न देने के मामलों को गंभीर बताते हुए उन्होंने तय समय सीमा में समाधान के निर्देश दिए, ताकि विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित न हो।
डिजिटल मॉनिटरिंग और स्वास्थ्य योजनाओं पर फोकस
एमआईएस रिपोर्टिंग, विद्यार्थियों के स्वास्थ्य परीक्षण, आयरन-फोलिक एसिड वितरण और पीएम पोषण योजना की डिजिटल निगरानी को मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए। विद्या समीक्षा केंद्रों के माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति में सुधार की सराहना भी की गई।
खेल और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को बढ़ावा
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 121 खिलाड़ियों ने 48 राष्ट्रीय पदक जीते हैं। खिलाड़ियों के लिए 1.22 करोड़ रुपये की डाइट मनी जारी की जाएगी तथा खेल छात्रावासों का चरणबद्ध विस्तार होगा।
नई पहलें और प्रशिक्षण
प्रधानाचार्यों के लिए इंडक्शन ट्रेनिंग, समग्र प्रगति कार्ड का पायलट विश्लेषण, ‘अभ्यास’ मॉड्यूल में जिलों की भागीदारी बढ़ाने और चंबा मॉडल की परीक्षा तैयारी को अन्य जिलों में लागू करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में शिक्षा सचिव राकेश कंवर, समग्र शिक्षा के परियोजना निदेशक राजेश शर्मा, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली सहित सभी जिलों के उप-निदेशक मौजूद रहे।