नौणी विश्वविद्यालय में युवाओं के लिए 100 दिवसीय रोडमैप शुरू, कौशल विकास और स्वरोजगार पर रहेगा फोकस

Himachal News

सोलन,

हिमाचल प्रदेश के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, उद्यमिता और रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने के लिए डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी ने 100 दिवसीय विकास रोडमैप की शुरुआत की है। राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति कविन्द्र गुप्ता ने इस योजना का शुभारम्भ करते हुए कहा कि युवाओं के शैक्षणिक ज्ञान को व्यावहारिक कौशल और बाजार की जरूरतों से जोड़ना समय की मांग है।

यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य के अनुरूप तैयार की गई है। इसका उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना, स्वरोजगार को बढ़ावा देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई संभावनाएं विकसित करना है।

विश्वविद्यालयों के बीच समन्वय से युवाओं को मिलेगा लाभ

राज्यपाल के निर्देशों पर गठित अंतर-विश्वविद्यालय ‘विकसित भारत टास्क फोर्स’ के तहत यह रोडमैप तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना, नवाचार को प्रोत्साहित करना और सफल पहलों को साझा करना है, ताकि उच्च शिक्षा को रोजगार एवं समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जा सके।

राज्यपाल ने हाल ही में प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को एक साझा मंच पर लाने के लिए इस टास्क फोर्स का गठन किया था। कुलपतियों के साथ संवाद के दौरान उन्होंने युवा सशक्तिकरण, कौशल विकास, नवाचार और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए 100 दिनों की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए थे।

नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार देने वाले बनें युवा

कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि युवा सशक्तिकरण, कौशल विकास और उद्यमिता देश की प्रगति के महत्वपूर्ण आधार हैं। हिमाचल के युवाओं में मौजूद प्रतिभा का पूरा लाभ उठाने के लिए उन्हें केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय व्यावहारिक प्रशिक्षण और उभरते आर्थिक अवसरों से जोड़ना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि बागवानी, वानिकी और इनसे जुड़े व्यवसायों में प्रदेश के युवाओं के लिए स्वरोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों में नए उद्यम शुरू करके युवा अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकते हैं।

राज्यपाल के अनुसार, 100 दिवसीय रोडमैप शिक्षा और वास्तविक बाजार की मांग के बीच की दूरी कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे युवाओं को अपने ज्ञान और कौशल को उपयोगी व्यवसायों में बदलने का अवसर मिलेगा।

बागवानी से मशरूम उत्पादन तक मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण

रोडमैप के तहत युवाओं को कृषि, बागवानी और वानिकी से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण देने की योजना बनाई गई है। इसमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • बाग प्रबंधन और ग्राफ्टिंग
  • नर्सरी उत्पादन और संरक्षित खेती
  • मशरूम उत्पादन और मधुमक्खी पालन
  • टिश्यू कल्चर और मृदा परीक्षण
  • कृषि-वानिकी और कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन

इसके अलावा विद्यार्थियों को अनुभवात्मक शिक्षा, ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव, व्यवसाय योजना तैयार करने, बाजार से जुड़ने और उद्योगों में इंटर्नशिप के अवसरों पर भी ध्यान दिया जाएगा। इससे उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाने और स्वयं का व्यवसाय शुरू करने की तैयारी में मदद मिलेगी।

ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और किसान समूहों पर भी ध्यान

इस पहल में ग्रामीण युवाओं के साथ महिलाओं, जनजातीय समुदायों, स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों को सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। योजना का लक्ष्य स्थानीय संसाधनों और उपलब्ध कौशल के आधार पर आजीविका के नए साधन विकसित करना है।

राज्यपाल ने रोडमैप तैयार करने के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरमिंदर सिंह बावेजा और उनकी टीम की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन से रोजगार एवं उद्यमिता के नए अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण आजीविका को मजबूती मिलेगी।

क्रियान्वयन और निगरानी के लिए बनेगी समन्वय टीम

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरमिंदर सिंह बावेजा ने राज्यपाल के मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि रोडमैप को निर्धारित समय-सीमा के भीतर लागू करने के लिए एक समर्पित समन्वय टीम काम करेगी।

यह टीम योजनाओं की प्रगति की नियमित निगरानी करेगी और परिणाम आधारित गतिविधियों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निभाएगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय इस पहल को हिमाचल के युवाओं और कृषक समुदायों के लिए ठोस लाभ में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है।