शिमला,
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में 2026-27 शैक्षणिक सत्र से एनईपी-2020 के अनुरूप स्नातक पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसके तहत उच्च शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय शैक्षणिक ढांचे के अनुसार सुदृढ़ किया जाएगा।
बैठक में शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों और शिक्षाविदों को निर्देश दिए कि Himachal Pradesh University, शिमला और Sardar Patel University, मंडी से संबद्ध सभी राजकीय महाविद्यालयों में नई शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि स्नातकोत्तर स्तर पर सेमेस्टर प्रणाली पहले ही सफलतापूर्वक लागू हो चुकी है और अब इसे स्नातक स्तर पर भी लागू किया जाएगा, जिससे छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी।
रोहित ठाकुर ने बताया कि एनईपी-2020 के तहत तीन वर्षीय स्नातक कार्यक्रम, चार वर्षीय ऑनर्स या ऑनर्स विद रिसर्च कार्यक्रम तथा पांच वर्षीय एकीकृत स्नातक-स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम को प्रारंभिक चरण में अधिक छात्र संख्या वाले कॉलेजों में लागू किया जाएगा।
उन्होंने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को तकनीकी मूल्यांकन, स्पॉट मूल्यांकन तथा मजबूत आंतरिक मूल्यांकन प्रणाली अपनाने के निर्देश भी दिए। इससे विश्वविद्यालयों को परीक्षा परिणाम 30 दिनों के भीतर घोषित करने में मदद मिलेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि उच्च शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए सरकार जल्द ही शिक्षकों के 389 पद भरेगी। इस संबंध में प्रस्ताव हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेज दिया गया है। इसके साथ ही कॉलेजों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए आंतरिक रैंकिंग प्रणाली भी लागू की जाएगी।
उन्होंने कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने पर बल देते हुए कहा कि पाठ्यक्रमों में व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास, इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप जैसे घटकों को शामिल किया जाएगा, ताकि छात्रों को रोजगारोन्मुखी शिक्षा मिल सके।
बैठक में सचिव राकेश कंवर, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत के. शर्मा, दोनों विश्वविद्यालयों के कुलपति, डीन ऑफ स्टडीज, विशेषज्ञ और विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्य सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।