शिमला,
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पिछले तीन वर्षों के दौरान खनिजों के दोहन से प्राप्त राजस्व में लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में खनन गतिविधियां वैज्ञानिक, पारदर्शी और पर्यावरण अनुकूल तरीके से संचालित की जाएं तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
उद्योग विभाग के अंतर्गत खनन विंग के कार्यों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2021-22 में मुख्य एवं लघु खनिजों से 200 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 340 करोड़ रुपये हो गया है।
पड़ोसी राज्यों के अतिरिक्त शुल्क से प्रभावित हुआ राजस्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड द्वारा हिमाचल से परिवहन होने वाले लघु खनिजों पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों से खनिजों के परिवहन में कमी आई है, जिससे राज्य के राजस्व पर प्रभाव पड़ा है। उन्होंने संबंधित विभाग को निर्देश दिए कि इस विषय को पड़ोसी राज्यों के समक्ष विधिसम्मत तरीके से उठाया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2014 से केंद्र सरकार ने चूना पत्थर (लाइमस्टोन) की रॉयल्टी दरों में संशोधन नहीं किया है, जिससे प्रदेश की आय प्रभावित हो रही है। राज्य सरकार इस मुद्दे को उचित मंच पर प्रभावी ढंग से उठाएगी।
पर्यावरण संरक्षण के साथ हो खनन
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में खनिजों का दोहन वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल तरीके से किया जाए। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं तथा प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप ही होना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि खनन गतिविधियों के दौरान नदियों, नालों, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचनी चाहिए तथा सभी पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
अवैध खनन पर होगी सख्त कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण रखने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खनन केवल अधिकृत और चिन्हित क्षेत्रों में ही किया जाए तथा संबंधित एजेंसियां नियमित निरीक्षण कर सभी गतिविधियों की निगरानी करें।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की नाजुक पारिस्थितिकी और प्राकृतिक धरोहर का संरक्षण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसलिए सभी हितधारकों को सतत और जिम्मेदार खनन को बढ़ावा देना चाहिए।
बैठक में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, प्रधान सचिव एम. सुधा देवी, सचिव पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन डॉ. सुशील कुमार सिंगला, उद्योग निदेशक विवेक भाटिया, हिमकोस्ट के संयुक्त सदस्य सचिव डॉ. सुरेश चंद अत्री सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।