धर्मशाला,
कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा सदैव ज्ञान, मूल्यों और चरित्र निर्माण के संतुलित समन्वय पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा प्रणाली का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं बल्कि व्यक्ति के समग्र विकास को सुनिश्चित करना रहा है।
राज्यपाल केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश, धर्मशाला में आयोजित 9वें दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग व्यक्तिगत प्रगति के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के विकास के लिए भी करें।
उन्होंने समारोह में स्वर्ण पदक विजेताओं और डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह गर्व की बात है कि 32 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए, जिनमें 23 छात्राएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की सफलता को दर्शाता है, जिसके कारण बेटियां शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।
दीक्षांत समारोह में विभिन्न संकायों के 511 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इस दौरान राज्यपाल ने सी.पी. राधाकृष्णन का देवभूमि हिमाचल में स्वागत करते हुए कहा कि उनका धर्मशाला में दीक्षांत समारोह में शामिल होना प्रदेश के लिए गौरव की बात है।
राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं होता, बल्कि यह जीवन के एक महत्त्वपूर्ण चरण की पूर्णता और नई जिम्मेदारियों की शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यह शिक्षा का अंत नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने की शुरुआत है।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस नीति का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी, बहुविषयक और कौशल आधारित बनाना है।
राज्यपाल ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर 34 महत्त्वपूर्ण कृतियों के प्रकाशन तथा संविधान की नौवीं अनुसूची में सूचीबद्ध भाषाओं, विशेषकर पंजाबी और डोगरी में पुस्तकों के अनुवाद के लिए भी विश्वविद्यालय की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह भारतीय भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में सराहनीय प्रयास है।
इस अवसर पर प्रो. चन्द्र कुमार, जयराम ठाकुर, अनुराग ठाकुर, राजीव भारद्वाज, कुलाधिपति हरमोहिंदर सिंह बेदी, कुलपति सत प्रकाश बंसल, संकाय सदस्य, छात्र और अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।