शिमला,
हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल और उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने आयुष्मान भारत योजना के तहत केंद्र से मिलने वाली धनराशि लंबित होने का मुद्दा उठाया है। 12 अक्टूबर को जारी संयुक्त प्रेस वक्तव्य में मंत्रियों ने दावा किया कि वर्ष 2021 से 2026 के दौरान योजना के तहत केंद्र के हिस्से के 112 करोड़ रुपये प्रदेश को जारी नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि धनराशि समय पर मिलने से राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी कई निर्माणाधीन परियोजनाओं को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
मंत्रियों ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार वित्तीय चुनौतियों के बावजूद लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए अपने संसाधनों से खर्च कर रही है। उन्होंने केंद्र सरकार और भाजपा नेताओं से जुड़े बयानों पर भी आपत्ति जताई और कहा कि प्रदेश के वित्तीय प्रबंधन तथा स्वास्थ्य योजनाओं की स्थिति पर तथ्य आधारित चर्चा होनी चाहिए।
आयुष्मान भारत के तहत 420 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. धनी राम शांडिल और उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान के अनुसार, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 90:10 के अनुपात में निर्धारित है।
मंत्रियों ने दावा किया कि वर्ष 2023 से वर्तमान सरकार के कार्यकाल में योजना के तहत लगभग 2.85 लाख लोगों का उपचार किया गया, जिस पर करीब 420 करोड़ रुपये खर्च हुए। उनके अनुसार, निर्धारित 90:10 अनुपात के आधार पर प्रदेश का हिस्सा लगभग 59 करोड़ रुपये बनता था, जबकि राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से लगभग 203 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च किए।
उन्होंने कहा कि सरकार ने जनहित को ध्यान में रखते हुए उपचार सुविधाओं को जारी रखने के लिए अतिरिक्त वित्तीय भार उठाया है।
स्वास्थ्य अधोसंरचना मिशन की राशि भी लंबित होने का आरोप
मंत्रियों ने प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अधोसंरचना मिशन के तहत स्वीकृत धनराशि का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार, क्रिटिकल केयर ब्लॉक, जिला एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं, शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट के विकास के लिए करीब 360 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे, जिनमें 90 प्रतिशत केंद्रीय हिस्सेदारी थी।
उन्होंने कहा कि पर्याप्त धनराशि जारी न होने से कई स्वास्थ्य परियोजनाओं का काम प्रभावित हुआ है। मंत्रियों के मुताबिक, समय पर वित्तीय सहायता मिलने से निम्नलिखित सुविधाओं को पूरा करने में मदद मिल सकती थी:
- 9 निर्माणाधीन क्रिटिकल केयर ब्लॉक
- 12 जिला एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशालाएं
- 38 शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर
- 73 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट
उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं के विकसित होने से लोगों को अपने घरों के नजदीक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने में सहायता मिलेगी।
पिछली सरकार की वित्तीय स्थिति पर भी उठाए सवाल
संयुक्त वक्तव्य में मंत्रियों ने वर्ष 2017 से 2022 तक प्रदेश में रही भाजपा सरकार के कार्यकाल की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व सरकार के दौरान वित्तीय प्रबंधन ठीक नहीं रहा और कर्मचारियों की देनदारियों का बोझ बढ़ा।
मंत्रियों के अनुसार, दिसंबर 2022 में जब वर्तमान सरकार ने कार्यभार संभाला, तब प्रदेश पर लगभग 75 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था और कर्मचारियों की करीब 10 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां लंबित थीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व सरकार कर्मचारियों को महंगाई भत्ता और वेतन आयोग से संबंधित देनदारियां समय पर देने में असमर्थ रही।
ये आरोप दोनों मंत्रियों ने अपने प्रेस वक्तव्य में लगाए हैं।
केंद्र से समय पर धनराशि जारी करने की मांग
मंत्रियों ने कहा कि केंद्र सरकार को विभिन्न योजनाओं के तहत प्रदेश की लंबित हिस्सेदारी समय पर जारी करनी चाहिए, ताकि विकास कार्य और स्वास्थ्य अधोसंरचना परियोजनाएं तय समय में पूरी हो सकें।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, पारदर्शिता और जवाबदेही पर ध्यान दे रही है। उनके अनुसार, केंद्र से मिलने वाली धनराशि उपलब्ध होने पर निर्माणाधीन स्वास्थ्य सुविधाओं को पूरा करने में मदद मिलेगी और प्रदेशवासियों को इसका लाभ मिल सकेगा।
यह वक्तव्य स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल और उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने 12 अक्टूबर, 2026 को शिमला से जारी किया।