शिमला,
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने रविवार को हिमाचल प्रदेश सचिवालय के आर्म्सडेल भवन चरण-4 के ब्लॉक-1 और 2 का लोकार्पण किया। इन भवनों के निर्माण पर करीब 9 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्यों के साथ-साथ सरकारी संस्थानों की आधारभूत संरचना का विस्तार भी आवश्यक है। विस्तारित सचिवालय भवन में जल्द ही विभिन्न कार्यालयों को स्थानांतरित किया जाएगा।
पीजी मेडिकल सीटों में 320 की रिकॉर्ड बढ़ोतरी
लोकार्पण के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में हुए विस्तार की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य के छह सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में पीजी मेडिकल सीटों की संख्या 277 से बढ़ाकर 597 कर दी गई है। इस तरह कुल 320 सीटों की वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री के अनुसार:
- आईजीएमसी शिमला: 139 से बढ़कर 230 सीटें, 91 की वृद्धि
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा: 99 से बढ़कर 156 सीटें, 57 की वृद्धि
- श्री लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज मंडी: 24 से बढ़कर 79 सीटें, 55 की वृद्धि
- डॉ. वाई.एस. परमार मेडिकल कॉलेज नाहन: 3 से बढ़कर 35 सीटें, 32 की वृद्धि
- पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज चंबा: 4 से बढ़कर 32 सीटें, 28 की वृद्धि
- डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर: 8 से बढ़कर 65 सीटें, 57 की वृद्धि
मुख्यमंत्री ने कहा कि पीजी सीटों में यह विस्तार प्रदेश के युवाओं के लिए विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा के अवसर बढ़ाएगा। इससे सरकारी अस्पतालों में प्रशिक्षित विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता भी मजबूत होगी।
स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक तकनीक पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार चिकित्सा संस्थानों के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के साथ आधुनिक तकनीक को भी बढ़ावा दे रही है। 15 से 20 वर्ष पुरानी मशीनों को बदलकर एम्स स्तर की आधुनिक मशीनें उपलब्ध करवाने की प्रक्रिया जारी है।
उन्होंने बताया कि चार वर्ष पहले प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों में चिकित्सकों की उपलब्धता करीब 35 प्रतिशत थी, जिसे वर्तमान सरकार ने 70 प्रतिशत से अधिक कर दिया है। अगले एक वर्ष में इसे 80 से 85 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
रेडियो डायग्नोसिस सेवाओं को भी मजबूत किया जा रहा है और इन सेवाओं में प्रतीक्षा अवधि को शून्य करने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और आधुनिक तकनीक के विस्तार से प्रदेशवासियों को इलाज के लिए बाहर जाने की जरूरत कम होगी और हर वर्ष करीब 1,000 करोड़ रुपये की बचत होने की संभावना है।
प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए आयोग गठित
मुख्यमंत्री ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि जनसुविधा और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रदेश में विभिन्न प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए आयोग गठित किया गया है। आयोग विस्तृत अध्ययन के बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा और रिपोर्ट के आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा।
इस अवसर पर विधायक हरीश जनारथा, नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, उप महापौर उमा कौशल, ओएसडी रितेश कपरेट, हिमकॉन अध्यक्ष विकेश चौहान, उपायुक्त अनुपम कश्यप, निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क राजीव कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, नगर निगम पार्षद और अन्य गणमान्य मौजूद रहे।