सामाजिक सद्भाव और राष्ट्र निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी: राज्यपाल

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जम्मू में द्वितीय सिख बौद्धिक सम्मेलन-2026 को राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने किया संबोधित

जम्मू,

राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने जम्मू के अभिनव थिएटर में आयोजित द्वितीय सिख बौद्धिक सम्मेलन-2026 में सामाजिक समरसता, आपसी सम्मान और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बुद्धिजीवियों और समुदाय के प्रबुद्ध लोगों से मानवता, समानता, सेवा तथा भाईचारे जैसे मूल्यों को समाज में आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

बाबा बंदा सिंह बहादुर मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में राज्यपाल ने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले बुद्धिजीवियों को सम्मानित भी किया। उन्होंने बाबा बंदा सिंह बहादुर की वीरता, त्याग और न्याय के लिए संघर्ष को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण है।

राज्यपाल ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी से प्रेरणा लेकर बाबा बंदा सिंह बहादुर ने अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया और समाज में समानता एवं न्याय की स्थापना के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनकी विरासत आज भी समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण और अधिकारों के लिए कार्य करने की प्रेरणा देती है।

सिख गुरुओं की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक

कविन्द्र गुप्ता ने सिख गुरुओं की शिक्षाओं की प्रासंगिकता का उल्लेख करते हुए गुरु नानक देव जी के समानता और सार्वभौमिक भाईचारे के संदेश को रेखांकित किया। उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह जी के साहस तथा धर्म और सत्य की रक्षा के लिए किए गए संघर्ष और चार साहिबजादों के सर्वोच्च बलिदान को भी स्मरण किया।

उन्होंने कहा कि ‘सरबत दा भला’ का सिद्धांत केवल सिख समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समूची मानवता के कल्याण, करुणा, सेवा और सामूहिक सुख-समृद्धि का व्यापक संदेश निहित है।

सिख विरासत के संरक्षण के प्रयासों का उल्लेख

राज्यपाल ने सिख विरासत के संरक्षण और सम्मान के लिए केंद्र सरकार की ओर से किए गए विभिन्न प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने करतारपुर साहिब गलियारे के खुलने, 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाए जाने सहित सिख समुदाय की आस्था, परंपराओं और योगदान को सम्मान देने वाली पहलों की चर्चा की।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की पहचान उसकी साझा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से बनी है। विभिन्न धर्मों, भाषाओं और परंपराओं का सह-अस्तित्व इस क्षेत्र की ताकत है। इस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए संवाद, आपसी सम्मान और शांति के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता आवश्यक है।

युवाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर

राज्यपाल ने कहा कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध करवाना, महिलाओं को सशक्त बनाना तथा प्रत्येक व्यक्ति के लिए गरिमा और न्याय सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने शिक्षा, जिम्मेदार नेतृत्व और सामुदायिक भागीदारी को इस दिशा में महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

उन्होंने समाज के सभी वर्गों से सिख गुरुओं की शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हुए मानवता, समानता, निःस्वार्थ सेवा और आपसी समझ की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया।

इससे पहले महंत मंजीत सिंह जी ने सम्मेलन के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे मंच सिख दर्शन और विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ समसामयिक सामाजिक मुद्दों पर सार्थक विमर्श का अवसर प्रदान करते हैं।

कार्यक्रम में डेरा नंगाली साहिब, पुंछ के महंत मंजीत सिंह जी, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हरजीत सिंह ग्रेवाल, बाबा बंदा सिंह बहादुर के गद्दीनशीन जतिंदर पाल सिंह सोढ़ी, मुख्य वक्ता डॉ. हरभजन सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।