शिमला,
हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों से मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘एंटी-चिट्टा जन आंदोलन’ को मजबूत बनाने के लिए सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को नशे की गिरफ्त से बचाना केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार, स्कूल, समाज और प्रशासन की साझा जिम्मेदारी है।
डीजीपी अशोक तिवारी ने शिमला के कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी स्कूल चेल्सी के वार्षिक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में विद्यार्थियों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए नशामुक्त हिमाचल के निर्माण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि एंटी-चिट्टा जन आंदोलन को केवल नशा तस्करों के विरुद्ध चलाया जा रहा पुलिस अभियान समझना उचित नहीं होगा। इसका व्यापक उद्देश्य प्रदेश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना और समाज को नशे के खिलाफ एकजुट करना है।
विद्यार्थियों को आंदोलन का संदेश आगे बढ़ाने की अपील
पुलिस महानिदेशक ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे चिट्टे और अन्य नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति अपने साथियों और परिवारों को जागरूक करें तथा इस जन आंदोलन के सक्रिय दूत बनें। उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों से भी नशे के बढ़ते खतरे के प्रति सतर्क रहने की अपील की।
उन्होंने कहा कि नशे की रोकथाम की शुरुआत घर और विद्यालय से होनी चाहिए। बच्चों के व्यवहार में आने वाले शुरुआती बदलावों को पहचानना, उनसे खुलकर बातचीत करना और आवश्यकता पड़ने पर समय रहते उचित कदम उठाना बेहद महत्वपूर्ण है।
बच्चों के साथ संवाद और विश्वास का माहौल जरूरी
डीजीपी ने अभिभावकों से अपने बच्चों के साथ पर्याप्त समय बिताने और उनकी परेशानियों को समझने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बच्चों पर पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करने, साथियों के बीच अपनी स्वीकार्यता बनाए रखने और सामाजिक अपेक्षाओं पर खरा उतरने का दबाव हो सकता है। ऐसे समय में माता-पिता का भावनात्मक सहयोग और संवेदनशील व्यवहार बच्चों को गलत दिशा में जाने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने कहा कि घर बच्चे की पहली पाठशाला और माता-पिता उसके पहले शिक्षक होते हैं। बच्चों को दिए गए संस्कार, आत्मविश्वास और सही निर्णय लेने का साहस उनके भविष्य को दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं।
सफलता केवल अंकों और पद से नहीं मापी जाती
वार्षिक समारोह की थीम ‘ओशन ओडैसी’ का उल्लेख करते हुए अशोक तिवारी ने विद्यार्थियों को जिज्ञासा, साहस और दयालुता के साथ जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सफलता का अर्थ केवल अच्छे अंक प्राप्त करना या ऊंचे पद तक पहुंचना नहीं है, बल्कि एक बेहतर और जिम्मेदार इंसान बनना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने विद्यार्थियों से सही बात के पक्ष में मजबूती से खड़े होने, साथियों के नकारात्मक दबाव से बचने और अस्थायी असफलताओं को अपने भविष्य पर हावी नहीं होने देने का आह्वान किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सराहना
पुलिस महानिदेशक ने समारोह के दौरान विद्यार्थियों की ओर से प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों, ड्रिल एवं बैंड प्रदर्शन, कराटे तथा स्केटिंग की सराहना की। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए सभी को बधाई दी।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश पुलिस नशा तस्करों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रखेगी, लेकिन चिट्टे के खिलाफ स्थायी सफलता हासिल करने के लिए समाज की व्यापक भागीदारी जरूरी है।
112 और ‘ट्रैक मी’ सुविधा की दी जानकारी
जन संपर्क कार्यक्रम के तहत विद्यालय परिसर में हिमाचल प्रदेश पुलिस की आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ईआरएसएस-112) को लेकर जागरूकता शिविर भी आयोजित किया गया। विद्यार्थियों और अभिभावकों को आपातकालीन हेल्पलाइन, महिलाओं की सुरक्षा के लिए उपलब्ध ‘ट्रैक मी’ सुविधा तथा समय पर पुलिस सहायता लेने के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
इस अवसर पर प्रदेश की ईआरएसएस-112 सेवा के प्रदर्शन में हुए सुधार को भी रेखांकित किया गया। आपातकालीन प्रतिक्रिया समय की राष्ट्रीय रैंकिंग में हिमाचल प्रदेश ने 34वें स्थान से प्रथम स्थान तक का सफर तय किया है।
डीजीपी ने विद्यालय में उपस्थित विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की कि वे एंटी-चिट्टा जन आंदोलन का संदेश विद्यालय से बाहर समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाएं और नशामुक्त हिमाचल के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।