शिमला,
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि प्रदेश सरकार पंचायत चौकीदारों की लंबित मांगों पर सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण से निर्णय ले रही है। उन्होंने कहा कि सेवा की पात्रता पूरी कर चुके पंचायत चौकीदारों को नियमित करने का निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने चौड़ा मैदान में पंचायत चौकीदार यूनियन द्वारा आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार पंचायत चौकीदारों के हितों के संरक्षण के लिए संवेदनशील है। उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष के बजट में पंचायत चौकीदारों के मानदेय में 500 रुपये की वृद्धि की गई है और उन्हें अब 9 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है।
कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से कार्य कर रही है। राज्य की संपदा का लाभ सभी वर्गों तक पहुंचे, इसके लिए दूरगामी निर्णय लिए जा रहे हैं और प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए नियमों एवं कानूनों में आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार के चोर दरवाजों को बंद कर तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक की बचत की है। साथ ही जल विद्युत परियोजनाओं में हिमाचल के वाजिब हक को सुनिश्चित करने की दिशा में भी सरकार कार्य कर रही है।
ओपीएस और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) देने का फैसला राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से लिया गया है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्राकृतिक खेती से उत्पादित—
- गेहूं पर 80 रुपये प्रति किलो
- मक्की पर 50 रुपये प्रति किलो
- कच्ची हल्दी पर 150 रुपये प्रति किलो
का समर्थन मूल्य प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि गाय के दूध पर 61 रुपये और भैंस के दूध पर 71 रुपये प्रति लीटर का समर्थन मूल्य दिया जा रहा है।
सम्मेलन में इंटक के उपाध्यक्ष पूर्ण चंद और पंचायत चौकीदार यूनियन (इंटक) के राज्य अध्यक्ष प्रेम वर्धन ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।