जम्मू,
राज्यपाल Kavinder Gupta ने जम्मू स्थित K. L. Saigal Hall में आयोजित समारोह में स्वर्गीय चंदन नेगी द्वारा लिखित डोगरी-पंजाबी शब्दकोष का विमोचन किया। यह कार्यक्रम पंजाबी लेखक सभा और जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि साहित्य समाज को सही दिशा दिखाने और सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि साहित्यिक रचनाएं गहरी सोच, धैर्य और मानवीय संवेदनाओं का प्रतिबिंब होती हैं।
Kavinder Gupta ने भारत की समृद्ध भाषाई विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, इतिहास और परंपराओं की पहचान भी हैं। उन्होंने पंजाबी साहित्य की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रेम, भाईचारे, साहस और मानवता जैसे मूल्यों को बढ़ावा देता है।
राज्यपाल ने साहित्य और संस्कृति के संरक्षण के लिए आयोजकों के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि युवाओं को अपनी भाषा और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत की विरासत और परंपराओं की रक्षा एक मजबूत राष्ट्र निर्माण के लिए जरूरी है।
डिजिटल युग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बावजूद पुस्तकों का महत्व आज भी बना हुआ है। किताबें ज्ञान, संवेदनशीलता, तार्किक सोच और नैतिक मूल्यों के विकास में अहम भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने युवाओं से साहित्य और संस्कृति से जुड़े रहने का आह्वान करते हुए कहा कि साहित्य समाज का सच्चा दर्पण है और सकारात्मक बदलाव लाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
इस अवसर पर Lalit Magotra, Khalid Hussain, Baljit Singh Raina, Surendra Neer सहित कई साहित्यकार और गणमान्य उपस्थित रहे।