जापान की तकनीकी दक्षता और कौशल विकास से हिमाचल के युवाओं को जोड़ने की संभावनाएं: राजेश धर्माणी

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टोक्यो,

हिमाचल प्रदेश के युवाओं को जापान की उन्नत तकनीक, कौशल विकास, नवाचार और कार्य-पद्धतियों से जोड़ने की दिशा में संभावनाएं तलाशने के लिए तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी के नेतृत्व में प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने टोक्यो स्थित भारतीय दूतावास में उप-मिशन प्रमुख आर. मधुसूदन से मुलाकात की। बैठक में विद्यार्थियों और युवाओं के लिए जापान में शिक्षा, प्रशिक्षण, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

आर. मधुसूदन ने प्रतिनिधिमंडल को हिमाचल प्रदेश से जुड़े विषयों के संदर्भ में भारतीय दूतावास की भूमिका और कार्यप्रणाली की जानकारी दी। दोनों पक्षों के बीच भारत-जापान संस्थागत सहयोग को मजबूत करने तथा प्रदेश के युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय अवसर तैयार करने पर भी विचार-विमर्श हुआ।

एआई और नई तकनीक में सहयोग पर जोर

राजेश धर्माणी ने कहा कि जापान की तकनीकी दक्षता और नवाचार के अनुभव से हिमाचल के युवाओं को काफी लाभ मिल सकता है। उन्होंने कहा कि एआई सहित तेजी से विकसित हो रही नई प्रौद्योगिकियों के दौर में युवाओं की तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि एआई के क्षेत्र में क्षमता निर्माण के साथ विश्वसनीय और लचीले डिजिटल बुनियादी ढांचे के विकास में जापान महत्वपूर्ण सहयोगी बन सकता है। सूचना प्रौद्योगिकी के समावेशी विस्तार से नवाचार को गति मिलेगी और प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार तथा उद्यमिता के नए अवसर खुल सकते हैं।

जापानी पर्यटकों को हिमाचल की ओर आकर्षित करने पर चर्चा

बैठक के दौरान हिमाचल प्रदेश के पर्यटन को जापान में बढ़ावा देने के विषय पर भी विशेष चर्चा हुई। धर्माणी ने कहा कि हिमाचल अपनी प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और शांत वातावरण के कारण देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है।

उन्होंने कहा कि धर्मशाला में परम पावन दलाई लामा की उपस्थिति ने हिमाचल को वैश्विक आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। प्रदेश के बौद्ध और आध्यात्मिक विरासत स्थलों को जापानी पर्यटकों के बीच प्रभावी ढंग से प्रचारित कर वहां से हिमाचल आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।

राजेश धर्माणी ने कहा कि भारत और जापान के बीच पहले से मजबूत सांस्कृतिक संबंध हैं और पर्यटन के क्षेत्र में सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल की आध्यात्मिक एवं बौद्ध विरासत को जापान में बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलेगा।

प्रस्तावित स्किल अकादमी में जापानी संस्थानों की भागीदारी पर मंथन

प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञान एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, क्षमता निर्माण और कौशल विकास के क्षेत्र में जापान की श्रेष्ठ कार्य-पद्धतियों को हिमाचल में अपनाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

इस दौरान प्रदेश में प्रस्तावित स्किल अकादमी जैसी पहलों में जापानी उद्योगों और संस्थानों की भागीदारी की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि जापानी विशेषज्ञता और संस्थागत सहयोग के माध्यम से प्रदेश में कौशल प्रशिक्षण को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मजबूत किया जा सकता है।

वैश्विक मंच से जोड़ना सरकार का लक्ष्य

तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य हिमाचल के युवाओं, शिक्षा, कौशल और पर्यटन की क्षमताओं को वैश्विक मंच से जोड़ना है। इससे युवाओं के लिए बेहतर प्रशिक्षण, रोजगार और विकास के नए रास्ते तैयार किए जा सकेंगे।

आर. मधुसूदन ने भारत और जापान के विभिन्न संस्थानों के बीच संपर्क एवं सहयोग स्थापित करने में भारतीय दूतावास की भूमिका को लेकर प्रतिनिधिमंडल को महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

प्रतिनिधिमंडल ने उनके मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि बैठक में हुई चर्चा को संबंधित जापानी संस्थानों एवं संगठनों के साथ आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि कौशल विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और रोजगार के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग की ठोस संभावनाएं विकसित की जा सकें।