प्रोजेक्ट ‘सर्कुलर भारत’ के तहत हिमाचल में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की पहल, विक्रमादित्य सिंह ने जनभागीदारी पर दिया जोर

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शिमला,

हिमाचल प्रदेश में शहरी क्षेत्रों की बढ़ती कचरा समस्या से निपटने और स्वच्छ एवं सतत शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश स्तरीय पहल शुरू की गई है। शहरी विकास विभाग और हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) के संयुक्त तत्वावधान में परियोजना ‘सर्कुलर भारत’ के तहत एक दिवसीय राज्य स्तरीय क्षमता संवर्धन कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ शहरी विकास एवं लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने किया। कार्यक्रम में प्रदेश के शहरी स्थानीय निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों और अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने पर चर्चा की गई, ताकि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।

कचरा प्रबंधन के लिए जनभागीदारी जरूरी

विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में बढ़ती कचरे की समस्या का समाधान केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए आम जनता की भागीदारी और प्रभावी जागरूकता अभियान बेहद जरूरी हैं।

उन्होंने कहा कि घरों और समुदायों के स्तर पर गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करने की आदत विकसित करनी होगी। इसके लिए लोगों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने सफाई कर्मचारियों के सम्मान, स्वाभिमान और सशक्तिकरण को भी प्राथमिकता देने की बात कही।

भविष्य की जरूरतों के अनुसार बने दीर्घकालिक योजना

शहरी विकास मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कचरे के निस्तारण के लिए भूमि की उपलब्धता सीमित है। इसलिए अगले 20 से 25 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक अपशिष्ट प्रबंधन योजना तैयार करनी होगी।

उन्होंने आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के साथ कचरे के पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने पर जोर दिया। प्लास्टिक कचरे के बेहतर उपयोग की संभावनाओं पर भी उन्होंने ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

मंत्री ने सुझाव दिया कि ‘सर्कुलर भारत’ परियोजना के तहत शुरुआत में कुछ चयनित क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाएं। इनसे प्राप्त अनुभव और परिणामों के आधार पर सफल मॉडल का अन्य क्षेत्रों में विस्तार किया जा सकता है।

स्रोत पर कचरा पृथक्करण पर रहेगा विशेष फोकस

निदेशक शहरी विकास नीरज कुमार ने परियोजना के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए कहा कि इसका मकसद शहरी स्थानीय निकायों की नेतृत्व क्षमता और संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करना है।

परियोजना के तहत कचरे का स्रोत पर पृथक्करण, संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण, संसाधनों की पुनर्प्राप्ति और पुनर्चक्रण जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) के प्रभावी संचालन को भी बेहतर बनाया जाएगा।

सर्कुलर इकोनॉमी को मिलेगा बढ़ावा

‘सर्कुलर भारत’ पहल के माध्यम से सर्कुलर इकोनॉमी और रिसोर्स रिकवरी के क्षेत्र में तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध करवाई जाएगी। इसके अलावा प्रशिक्षण जरूरतों का आकलन, क्षमता संवर्धन कार्यशालाएं, तकनीकी सहयोग और विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय को बढ़ावा दिया जाएगा।

इस पहल के तहत कचरे के उत्पादन को कम करने, स्रोत पर पृथक्करण, संग्रहण एवं प्रसंस्करण, उपयोगी संसाधनों की पुनर्प्राप्ति और पुनर्चक्रण के साथ मौजूदा अपशिष्ट प्रबंधन ढांचे के बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया जाएगा।

कार्यक्रम में नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान, हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक बी.पी. बिद्दप्पा, विभिन्न शहरी स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि एवं अधिकारी, शहरी विकास विभाग के अधिकारी और फीडबैक फाउंडेशन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।