प्रदेश में फेल हुई दवाइयों पर कड़ी कार्रवाई — दोषी कंपनियां होंगी ब्लैकलिस्ट, लाइसेंस रद्द तक की चेतावनी — स्वास्थ्य मंत्री शांडिल
शिमला।
देशभर में कल से शुरू हो रहे पल्स पोलियो अभियान के तहत हिमाचल प्रदेश में 5793 पोलियो बूथ स्थापित किए गए हैं, जहां 5 साल तक के बच्चों को पोलियो की दो बूंद दवा पिलाई जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग ने घोषणा की है कि इस अभियान का लक्ष्य है कि प्रदेश में कोई भी बच्चा पोलियो ड्रॉप से वंचित न रहे। अभियान के लिए दूर-दराज, जनजातीय क्षेत्रों, निर्माण स्थलों और पर्यटक स्थलों तक विशेष टीमें भेजी जा रही हैं।
प्रत्येक बूथ की मॉनिटरिंग टीमों द्वारा निगरानी की जाएगी, ताकि कवरेज 100% के करीब रहे और हिमाचल, पोलियो-फ्री भारत मिशन का मजबूत हिस्सा बने।
लक्ष्य — लगभग 6.5 लाख बच्चों तक पहुंच
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार
- प्रदेश में लगभग 6.5 लाख बच्चों को पोलियो ड्रॉप पिलाने का लक्ष्य
- बूथों पर हेल्थ वर्कर्स, आशा वर्कर्स, आंगनबाड़ी कर्मी तैनात
- घर–घर टीमें भी सक्रिय
फेल दवा सैंपल पर स्वास्थ्य मंत्री का ऐक्शन मोड — दोषी कंपनियों पर काली सूची, राज्य में काम बंद
स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल ने दवाइयों के फेल हुए सैंपलों पर कड़ा रुख अपनाया है।
शांडिल ने कहा—
“दवा सैंपल फेल होना दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया जाता है और जब तक वे मानक पूरा नहीं करते, हिमाचल में काम की अनुमति नहीं मिलती।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि—
- जिन कंपनियों के नमूने फेल हुए, उनके अधिकारियों को जांच में तलब किया गया
- बद्दी–नालागढ़ क्षेत्र में छापेमारी बढ़ाई गई
- फर्जी लेबलिंग व बाहरी राज्यों की मैन्युफैक्चरिंग पर भी जांच
मंत्री ने कहा—
“कोई भी कंपनी हिमाचल का नाम खराब नहीं कर सकती — दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”
दवा उद्योग पर कड़ा संदेश
- फेल सैंपलों पर लाइसेंस रद्द तक की कार्रवाई संभव
- फर्जी कंपनियों की पहचान पर एफआईआर और कानूनी कार्रवाई
- हिमाचल की फार्मा विश्वसनीयता की रक्षा प्राथमिकता