शिमला,
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में कविन्द्र गुप्ता ने आज लोक भवन में आयोजित गरिमामय समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण की। उन्हें गुरमीत सिंह संधावालिया ने शपथ दिलाई। उन्होंने हिंदी में शपथ ली और इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश के 30वें राज्यपाल के रूप में अपना कार्यभार संभाल लिया।
समारोह में असीम कुमार घोष अपनी धर्मपत्नी मित्रा घोष, मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, लेडी गवर्नर बिंदु गुप्ता सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
लोक भवन में आयोजित इस समारोह की शुरुआत पहली बार वंदे मातरम् के गायन से हुई, जिसके बाद राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया। शपथ ग्रहण के बाद पुनः वंदे मातरम् गाया गया और राज्यपाल को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।
इससे पहले मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने भारत के राष्ट्रपति द्वारा जारी वारंट ऑफ अपॉइंटमेंट पढ़कर सुनाया। इसके बाद राज्यपाल के सचिव सी.पी. वर्मा ने राज्यपाल से कार्यभार ग्रहण प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर करवाए।
समारोह में उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, आयुष मंत्री यादवेंद्र गोमा, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा सहित कई विधायक, अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
शपथ ग्रहण से पहले सुबह कविन्द्र गुप्ता ने अपने परिजनों के साथ पूजा-अर्चना भी की। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने इस संवैधानिक पद पर नियुक्त करने के लिए भारत के राष्ट्रपति का आभार व्यक्त किया और कहा कि वे संविधान के अनुसार कार्य करते हुए राज्य सरकार के साथ समन्वय बनाए रखेंगे।
राज्यपाल ने कहा कि वे पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देंगे। उन्होंने जनजातीय विकास, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन, युवा कल्याण और नशा मुक्ति अभियान को भी मजबूत बनाने की बात कही।
उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ जैसी योजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा और टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भी विशेष प्रयास किए जाएंगे।
राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार, विपक्ष और समाज के विभिन्न वर्गों के सहयोग से हिमाचल प्रदेश को समावेशी और सतत विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।