नई दिल्ली,
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में हिमाचल प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को मजबूती से उठाया। ‘विकसित भारत के लिए समावेशी मानव विकास’ विषय पर आयोजित इस बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के वित्तीय हितों, आपदा राहत, जलविद्युत परियोजनाओं और पर्यटन विकास से जुड़े कई अहम विषयों पर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश वर्तमान में कई आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने का आग्रह किया, जो राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) की समाप्ति, प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान, जलविद्युत परियोजनाओं में मुफ्त बिजली हिस्सेदारी में कमी और जीएसटी से हुए राजस्व नुकसान का आकलन करे।
उन्होंने कहा कि आरडीजी बंद होने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। साथ ही पहाड़ी राज्यों के लिए घोषित 25 हजार करोड़ रुपये की सहायता राशि को बढ़ाकर 50 हजार करोड़ रुपये करने की मांग भी रखी, ताकि विकास कार्यों की गति प्रभावित न हो।
मुख्यमंत्री ने हिमाचल को देश का ‘ग्रीन फ्रंटियर’ बताते हुए कहा कि राज्य हर वर्ष लगभग 90 हजार करोड़ रुपये मूल्य की पारिस्थितिकीय सेवाएं देश को प्रदान करता है, लेकिन इसके अनुरूप आर्थिक प्रतिपूर्ति नहीं मिल रही। उन्होंने इस दिशा में केंद्र से विशेष सहयोग की मांग की।
बैठक में मुख्यमंत्री ने जलविद्युत क्षेत्र से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग 13 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन होने के बावजूद हिमाचल को मुफ्त बिजली का पर्याप्त लाभ नहीं मिल रहा। इसके अलावा भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से मिलने वाली करीब 7 हजार करोड़ रुपये की बकाया राशि का मामला भी उन्होंने प्रमुखता से उठाया।
सुक्खू ने कहा कि वर्ष 2023 और 2025 की प्राकृतिक आपदाओं से प्रदेश को भारी नुकसान हुआ, लेकिन केंद्र द्वारा घोषित 1500 करोड़ रुपये की विशेष सहायता राशि अभी तक जारी नहीं हुई है। उन्होंने इस राशि को शीघ्र जारी करने की मांग की।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा और मानव विकास के क्षेत्र में प्रदेश की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि हिमाचल वर्ष 2025 में पूर्ण साक्षर राज्य घोषित हुआ है तथा स्कूल शिक्षा प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक में राज्य ने उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। उच्च शिक्षा में भी प्रदेश का सकल नामांकन अनुपात राष्ट्रीय औसत से काफी बेहतर है।
पर्यटन विकास को लेकर मुख्यमंत्री ने गग्गल हवाई अड्डे के विस्तार का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बेहतर हवाई संपर्क से हिमाचल को ‘वन स्टेट, वन इंटरनेशनल डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित किया जा सकता है।
उन्होंने नशे के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियान की जानकारी भी दी और केंद्र सरकार से खुफिया तंत्र मजबूत करने तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने में सहयोग का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के सपने को साकार करने में हिमाचल प्रदेश महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, लेकिन इसके लिए पहाड़ी राज्य की विशेष परिस्थितियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र से न्यायसंगत सहयोग मिलना आवश्यक है।