हिमाचल में हवाई संपर्क मजबूत करने के लिए त्रिपक्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर, 10 साल तक प्रभावी रहेगा समझौता

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नई दिल्ली: हिमाचल प्रदेश में हवाई संपर्क और विमानन अवसंरचना को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। प्रदेश सरकार, भारत सरकार के नागर विमानन मंत्रालय और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के बीच संशोधित क्षेत्रीय संपर्क योजना-उड़ान के तहत त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

समझौते का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश में मौजूदा हवाई सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ नई उड़ान सेवाओं तथा पात्र विमानन अवसंरचना के विकास और संचालन के लिए केंद्र व राज्य के बीच सहयोग को मजबूत करना है।

10 वर्षों तक प्रभावी रहेगा समझौता

पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग के सचिव संदीप कुमार ने बताया कि नई दिल्ली में हुए इस समझौता ज्ञापन पर केंद्रीय नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू और केंद्रीय नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।

उन्होंने बताया कि यह समझौता 10 वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा। इसके तहत मौजूदा और प्रस्तावित नई उड़ान सेवाओं के साथ-साथ पात्र विमानन अवसंरचना के विकास एवं संचालन के लिए एक व्यापक सहयोगात्मक व्यवस्था तैयार की गई है।

वर्तमान व्यवस्था में 20 प्रतिशत VGF देगा हिमाचल

संदीप कुमार के अनुसार वर्तमान व्यवस्था के तहत हवाई सेवाओं के लिए आवश्यक व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) में हिमाचल प्रदेश सरकार का हिस्सा 20 प्रतिशत होगा, जबकि शेष 80 प्रतिशत वित्तीय योगदान केंद्र सरकार द्वारा किया जाएगा।

हालांकि, हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने VGF के अनुपात में बदलाव की मांग की है।

90:10 VGF अनुपात की मांग

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों और यहां हवाई सेवाओं के संचालन में आने वाली अपेक्षाकृत अधिक लागत को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हाल ही में केंद्रीय नागर विमानन मंत्री के समक्ष प्रदेश के लिए संशोधित 90:10 VGF अनुपात लागू करने का आग्रह किया है।

प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार हवाई सेवाओं के लिए 90 प्रतिशत वित्तीय सहायता केंद्र सरकार और 10 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा वहन की जाएगी। राज्य सरकार का कहना है कि इससे पर्वतीय प्रदेश में हवाई सेवाओं को अधिक व्यवहार्य बनाने में मदद मिल सकती है।

पर्यटन और दूरदराज के क्षेत्रों को मिलेगा लाभ

हवाई संपर्क के विस्तार को हिमाचल प्रदेश के पर्यटन और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बेहतर हवाई सेवाओं से देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले पर्यटकों और व्यावसायिक यात्रियों की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है।

इसके अलावा प्रदेश के दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच में भी सुधार हो सकता है। विमानन अवसंरचना के विकास से पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक अवसरों को भी गति मिलने की संभावना है।

प्रदेश सरकार के अनुसार संशोधित उड़ान योजना के तहत यह समझौता हिमाचल में हवाई संपर्क को अधिक व्यापक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगा।