हिमाचल के 17 निजी विश्वविद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था की होगी समीक्षा, पुलिस के साथ बनेगा समन्वय तंत्र

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शिमला,

हिमाचल प्रदेश के विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन मिलकर काम करेंगे। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के निर्देशों के बाद पुलिस मुख्यालय शिमला में प्रदेश के 17 निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई। इसमें परिसर की सुरक्षा, छात्रावासों की निगरानी, नशे पर रोक और आपात स्थितियों से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने पर चर्चा हुई।

पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी की अध्यक्षता में हुई बैठक का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और पुलिस तथा विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करना रहा। मुख्यमंत्री ने पड़ोसी राज्यों के विश्वविद्यालयों में हाल ही में सामने आई घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के निर्देश दिए थे।

प्रवेश द्वार से छात्रावासों तक सुरक्षा व्यवस्था होगी मजबूत

बैठक में विश्वविद्यालय परिसरों के प्रवेश और निकास द्वारों पर निगरानी, आगंतुकों के सत्यापन, छात्रावासों की सुरक्षा तथा निजी सुरक्षा कर्मियों के पुलिस सत्यापन और नियमित प्रशिक्षण जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

बैठक की शुरुआत लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी और चितकारा यूनिवर्सिटी में हुई हालिया घटनाओं से संबंधित प्रस्तुति के साथ हुई। इसके बाद शिक्षण संस्थानों में सुरक्षा संबंधी चुनौतियों और उनसे बचाव के उपायों पर चर्चा की गई।

हर विश्वविद्यालय में नियुक्त होगा नोडल सुरक्षा अधिकारी

पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल के लिए प्रत्येक विश्वविद्यालय में एक नोडल सुरक्षा अधिकारी नामित किया जाएगा। यह अधिकारी संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक के साथ लगातार संपर्क में रहेगा।

इसके अलावा विश्वविद्यालय परिसरों का संयुक्त सुरक्षा ऑडिट किया जाएगा। किसी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट कार्यप्रणाली भी तैयार की जाएगी, ताकि किसी घटना के समय पुलिस और संस्थान प्रशासन के बीच भ्रम की स्थिति न बने।

अफवाहों पर रोक के लिए अधिकृत प्रवक्ता करेंगे संवाद

किसी घटना के बाद सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं और अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए पुलिस के साइबर क्राइम और मीडिया प्रकोष्ठ के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा। प्रत्येक विश्वविद्यालय एक अधिकृत प्रवक्ता नियुक्त करेगा, जो जरूरत पड़ने पर सही और प्रमाणित जानकारी समय पर साझा करेगा।

पुलिस महानिदेशक ने विश्वविद्यालयों को तकनीक का बेहतर इस्तेमाल करने, साइबर सुरक्षा के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक करने और यातायात स्वयंसेवक योजना को बढ़ावा देने का आग्रह किया। पुलिस और विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग को स्थायी व्यवस्था बनाने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) की संभावना पर भी चर्चा की गई।

एंटी-चिट्टा अभियान में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर

बैठक में प्रदेशभर में चल रहे एंटी-चिट्टा जन आंदोलन में विश्वविद्यालयों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने पर भी विचार किया गया। पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन परिसर के भीतर तथा आसपास के क्षेत्रों में नशे से जुड़ी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए मिलकर प्रयास करेंगे।

पुलिस महानिदेशक ने कहा कि विद्यार्थियों को नशे, साइबर अपराध और अन्य सुरक्षा संबंधी जोखिमों से बचाना सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को इन चुनौतियों के प्रति सतर्क करने का आग्रह किया।

112 और ‘ट्रैक मी’ सुविधा के बारे में जागरूक होंगे विद्यार्थी

अशोक तिवारी ने बताया कि हिमाचल प्रदेश पुलिस की आपातकालीन सेवा 112 राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान पर है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं को 112 और महिलाओं की सुरक्षा के लिए उपलब्ध ‘ट्रैक मी’ सुविधा की जानकारी देने की अपील की।

उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों से किसी भी आपात स्थिति, संदिग्ध गतिविधि या सुरक्षा संबंधी समस्या की सूचना तुरंत 112 पर देने का आग्रह किया। साथ ही विश्वविद्यालयों को पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया माध्यमों से जुड़ने के लिए भी कहा।

घटना के बाद कार्रवाई के बजाय रोकथाम पर रहेगा ध्यान

पुलिस महानिदेशक ने कहा कि पुलिस का प्रयास केवल किसी अप्रिय घटना के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिससे घटनाओं को पहले ही रोका जा सके। उन्होंने विश्वास जताया कि नियमित संवाद और आपसी सहयोग से प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में सुरक्षित एवं सकारात्मक माहौल बनाने में मदद मिलेगी।

बैठक में आईजी सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, डीआईजी दक्षिणी रेंज, डीआईजी कानून एवं व्यवस्था, कमांडेंट प्रथम भारतीय आरक्षित वाहिनी तथा सोलन, शिमला, मंडी, बद्दी, कांगड़ा और ऊना के पुलिस अधीक्षकों सहित पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।