कुल्लू,
हिमाचल प्रदेश के किसानों और बागवानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध करवाने की दिशा में प्रदेश सरकार के प्रयासों को एक और सफलता मिली है। कुल्लू जिला में उत्पादित सिंदूरी किस्म के 1.3 मीट्रिक टन अनार की खेप संयुक्त अरब अमीरात के दुबई शहर को निर्यात की गई है। सरकार का कहना है कि इससे किसानों और बागवानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य हासिल करने के लिए वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों और बागवानों की आर्थिकी मजबूत करने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। सरकार का प्रयास है कि कृषि एवं बागवानी उत्पादों को प्रदेश और देश के बाजारों के साथ-साथ विदेशों तक पहुंचाया जाए, जिससे उत्पादकों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके।
600 किसानों से जुड़े एफपीओ के माध्यम से हुआ निर्यात
दुबई भेजे गए अनार कुल्लू के किसानों से एकत्र किए गए थे। इनके संग्रहण और निर्यात में कुल्लू स्थित भुंतर किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस एफपीओ से करीब 600 किसान जुड़े हुए हैं।
निर्यात की प्रक्रिया में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA), चंडीगढ़ के क्षेत्रीय कार्यालय ने सहयोग प्रदान किया। अनार की आपूर्ति करने वाले किसानों में रीना देवी, संजय कुमार, नितिश कुमार और वीर सिंह गुलेरिया शामिल रहे।
किसानों को विदेशी बाजारों से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी उपज को बेहतर बाजार उपलब्ध करवाना भी जरूरी है। इसी दिशा में प्रदेश सरकार किसानों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच दिलाने के लिए आवश्यक सुविधाएं और सहयोग उपलब्ध करवा रही है।
उन्होंने कहा कि कृषि एवं बागवानी उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देकर हिमाचल के किसानों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जा रहा है।
चेरी और प्लम की खेप भी ओमान भेजी गई थी
मुख्यमंत्री ने बताया कि इसी वर्ष जून में शिमला जिले के जड़ोल-टिक्कर और बागी क्षेत्रों के छह प्रगतिशील किसानों द्वारा उत्पादित 400 किलोग्राम चेरी और 400 किलोग्राम प्लम की पहली खेप ओमान को निर्यात की गई थी।
उन्होंने किसानों से अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग और गुणवत्ता मानकों को ध्यान में रखते हुए उच्च गुणवत्ता वाली फसलों तथा फल किस्मों के उत्पादन पर जोर देने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के माध्यम से हिमाचल प्रदेश के फल वैश्विक बाजार में अपनी अलग पहचान कायम कर सकते हैं।