शिमला,
हिमाचल प्रदेश में भूमि से जुड़े राजस्व मामलों के निपटारे और रिकॉर्ड को अद्यतन करने के लिए डिजिटल व्यवस्था का विस्तार किया जा रहा है। राजस्व विभाग के अनुसार, राजस्व प्रबंधन प्रणाली (RMS) के माध्यम से अब तक 2,12,918 मामलों को प्रोसेस किया जा चुका है। वहीं, लंबित जमाबंदियों में करीब 90 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
प्रदेश में जमाबंदी, इंतकाल, निशानदेही और तकसीम जैसी सेवाएं आम लोगों की जमीन और संपत्ति से सीधे जुड़ी हैं। इन्हें अधिक पारदर्शी, सुलभ और समयबद्ध बनाने के लिए विभाग ने बीते चार वर्षों में भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और ऑनलाइन सेवाओं पर जोर दिया है। इसके तहत ई-हिमभूमि, RMS, RCCMS, भू-नक्शा और माई डीड जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं।
प्रदेश की सभी 479 राजस्व अदालतें ऑनलाइन प्रणाली से जुड़ीं
राजस्व अदालतों की कार्यप्रणाली को डिजिटल बनाने के लिए RMS पोर्टल को 1 सितंबर 2025 से पूरी तरह ऑनलाइन और पेपरलेस तरीके से संचालित किया जा रहा है। इसके लिए 9 सितंबर 2025 को हिमाचल प्रदेश रेवेन्यू कोर्ट्स ऑनलाइन फाइलिंग एंड प्रोसीजर रूल्स-2025 अधिसूचित किए गए।
विभाग के अनुसार, RMS के माध्यम से प्रोसेस किए गए कुल 2,12,918 मामलों में से 71,000 मामले ऑनलाइन और पेपरलेस रेवेन्यू कोर्ट मॉड्यूल के जरिए दर्ज किए गए हैं। प्रदेश की सभी 479 राजस्व अदालतों को इस प्रणाली से जोड़ा जा चुका है। इस प्लेटफॉर्म पर करीब 28,000 कॉज लिस्ट तैयार की गई हैं। वहीं, लगभग 16,000 अधिवक्ता और 52,000 से अधिक नागरिक भी पंजीकरण करवा चुके हैं।
मासिक लोक अदालतों से लंबित मामलों के निपटारे पर जोर
राजस्व मामलों के शीघ्र समाधान के लिए हर महीने के अंतिम दिनों में मासिक लोक अदालतें आयोजित की जा रही हैं। इनमें तकसीम, निशानदेही, राजस्व रिकॉर्ड में सुधार और अतिक्रमण से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी जाती है। विभाग का उद्देश्य इन मामलों का समयबद्ध निपटारा कर लोगों को लंबे इंतजार और बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देना है।
लंबित जमाबंदियां 6,500 से घटकर करीब 750 रह गईं
भूमि रिकॉर्ड को मौजूदा स्थिति के अनुरूप बनाए रखने के लिए राजस्व विभाग ने लंबित जमाबंदियों के निपटारे को लेकर विशेष अभियान चलाया। अधिकारियों और फील्ड कर्मचारियों को निर्धारित लक्ष्य देकर रिकॉर्ड अपडेट करने के निर्देश दिए गए।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान के परिणामस्वरूप लंबित जमाबंदियों की संख्या लगभग 6,500 से घटकर 750 रह गई है। इस तरह करीब 5,750 जमाबंदियों को अपडेट किया गया और लंबित कार्य में लगभग 90 प्रतिशत की कमी आई। इन रिकॉर्ड में पिछले पांच वर्षों के दौरान जमीन से संबंधित लेनदेन को भी दर्ज कर वर्तमान स्थिति के अनुरूप बनाया गया है।
मोबाइल पर मिलेगी डिजिटल हस्ताक्षरित जमाबंदी
ई-हिमभूमि पोर्टल के माध्यम से नागरिक अब डिजिटल हस्ताक्षरित जमाबंदी अपने मोबाइल फोन पर प्राप्त कर सकते हैं। यह सुविधा खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है, जो रोजगार या शिक्षा के कारण अपने गांव और पैतृक क्षेत्र से दूर रहते हैं।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार राजस्व सेवाओं को तकनीक आधारित और नागरिक-केंद्रित बनाने पर काम कर रही है। विभाग का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार से भूमि रिकॉर्ड की उपलब्धता, राजस्व अदालतों की ऑनलाइन प्रक्रिया और मामलों की निगरानी को अधिक सुगम बनाने में मदद मिल रही है।