हमीरपुर,
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने करियर प्वाइंट विश्वविद्यालय (CPU), हमीरपुर के 12वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए विद्यार्थियों से अपनी शिक्षा और कौशल का इस्तेमाल समाज में सकारात्मक बदलाव लाने तथा राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उपलब्धियां हासिल करना नहीं, बल्कि अपने ज्ञान को समाज की जरूरतों और देश के विकास से जोड़ना भी है।
समारोह में कुल 648 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें 43 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि मिली, जबकि शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए 43 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। स्वर्ण पदक प्राप्त करने वालों में 29 छात्राएं और 14 छात्र शामिल रहे।
100 गांवों को गोद लेने की पहल की सराहना
राज्यपाल ने डिग्री और स्वर्ण पदक हासिल करने वाले विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावकों तथा विश्वविद्यालय के शिक्षकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि करियर प्वाइंट विश्वविद्यालय ने ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने विश्वविद्यालय की ओर से 100 गांवों को गोद लेने, ‘मेरा गांव मेरा तीर्थ’ अभियान और ग्रामीण आजीविका को प्रोत्साहित करने के प्रयासों की सराहना की। इन पहलों के तहत स्वास्थ्य जागरूकता और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने जैसे कार्य भी किए जा रहे हैं।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की ‘विज्ञान दर्शन’ पहल का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और उन्हें अनुसंधान तथा नवाचार से जोड़ने पर जोर दिया।
सफलता का पैमाना समाज में सकारात्मक बदलाव
कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि सफलता को केवल अच्छे वेतन, बड़े पद या सामाजिक पहचान के आधार पर नहीं मापना चाहिए। इसकी असली सार्थकता इस बात में है कि व्यक्ति अपने ज्ञान और कार्यों से दूसरों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव ला पाता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपने गांव, संस्कृति और मूल जड़ों से जुड़े रहने की अपील की। साथ ही कहा कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद युवाओं को सामाजिक चुनौतियों के समाधान में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
कृषि, पर्यटन और तकनीक में शोध को मिले बढ़ावा
राज्यपाल ने विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के विश्वविद्यालयों को कृषि, पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान एवं नवाचार को प्राथमिकता देनी चाहिए। इससे शिक्षा और शोध को स्थानीय जरूरतों तथा जनकल्याण से जोड़ने में मदद मिलेगी।
उन्होंने विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन की सराहना की। इसके अलावा योग, पारंपरिक चिकित्सा, भारतीय मूल्यों और मोटे अनाज यानी मिलेट्स को प्रोत्साहित करने से जुड़े प्रयासों की भी प्रशंसा की।
तीन विभूतियों को मानद उपाधियां प्रदान कीं
दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल ने तीन विशिष्ट व्यक्तित्वों को मानद उपाधियों से सम्मानित किया। इनमें हिमाचल प्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व उद्योग मंत्री कुलदीप धीमान, नई दिल्ली स्थित सर गंगा राम अस्पताल के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. डी.एस. राणा और प्रसिद्ध हिमाचली लोक गायक करनैल राणा शामिल रहे।
इस अवसर पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट का विमोचन किया और मिलेट्स पर आधारित पुस्तक का लोकार्पण भी किया। उन्होंने मिलेट्स फेस्टिवल के विजेताओं को सम्मानित किया।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजीव शर्मा ने संस्थान की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। प्रति-कुलाधिपति पद्मश्री डॉ. पी.एल. गौतम ने राज्यपाल का स्वागत किया। कुलदीप धीमान और डॉ. डी.एस. राणा ने भी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के कुलसचिव गुलशन संधू ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस अवसर पर सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी के कुलपति डॉ. ललित कुमार अवस्थी, विश्वविद्यालय की गवर्निंग बॉडी, बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट और अकादमिक काउंसिल के सदस्य सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।