पालमपुर,
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाएं देश में चिकित्सा सेवाओं की पहुंच, गुणवत्ता और सामर्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आयुष्मान भारत, आयुष्मान आरोग्य मंदिर और डिजिटल स्वास्थ्य मिशन जैसी पहलों से ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के प्रयासों को गति मिली है।
राज्यपाल पालमपुर में नॉर्थ जोन ऑप्थैल्मोलॉजिकल सोसाइटी के 38वें वार्षिक सम्मेलन और हिमाचल प्रदेश ऑप्थैल्मोलॉजिकल सोसाइटी की वार्षिक बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार का वास्तविक उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को उसकी आर्थिक स्थिति और भौगोलिक परिस्थितियों से परे बेहतर उपचार उपलब्ध करवाना होना चाहिए।
आयुष्मान भारत और डिजिटल मिशन से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती
कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि आयुष्मान भारत, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने 70 वर्ष और इससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयुष्मान भारत योजना के स्वास्थ्य कवरेज के विस्तार को भी महत्वपूर्ण कदम बताया।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य अधोसंरचना का विस्तार, प्राथमिक चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करना और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के लिए जरूरी है।
हिमाचल को 320 पीजी मेडिकल सीटों के लिए 415 करोड़ रुपये
राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश में स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा की 320 अतिरिक्त सीटें स्वीकृत करने और इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से 415 करोड़ रुपये आवंटित किए जाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने और चिकित्सा शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचे आधुनिक नेत्र उपचार
राज्यपाल ने नेत्र स्वास्थ्य को जनकल्याण से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताते हुए कहा कि आंखों की रोशनी सुरक्षित रखना और रोकी जा सकने वाली अंधता की रोकथाम करना चिकित्सा जगत की बड़ी जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक जांच तकनीक, उन्नत सर्जरी, रेटिना उपचार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से नेत्र रोगों की जल्द पहचान और बेहतर उपचार के नए अवसर उपलब्ध हुए हैं। हालांकि, इन सुविधाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना भी उतना ही जरूरी है।
हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में लंबी दूरियां, सीमित परिवहन और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण दूरदराज के लोगों को आधुनिक चिकित्सा सेवाएं प्राप्त करने में कठिनाइयां होती हैं।
उन्होंने सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों, निजी चिकित्सा संगठनों, विशेषज्ञ समितियों और सेवा संस्थाओं से मिलकर काम करने का आह्वान किया, ताकि दुर्गम क्षेत्रों में भी बेहतर नेत्र उपचार उपलब्ध करवाया जा सके।
डॉ. सुधीर सल्होत्रा बने एनजेडओएस के अध्यक्ष
सम्मेलन के दौरान राज्यपाल ने डॉ. सुधीर सल्होत्रा को नॉर्थ जोन ऑप्थैल्मोलॉजिकल सोसाइटी के 38वें अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण करवाया। चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. सूरत सिंह को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर एनजेडओएस जर्नल का विमोचन किया गया और हिमाचल प्रदेश ऑप्थैल्मोलॉजिकल सोसाइटी की वेबसाइट का शुभारंभ भी किया गया।
इससे पहले एनजेडओएस के अध्यक्ष डॉ. गौरव लूथरा और पालमपुर रोटरी आई फाउंडेशन के निदेशक डॉ. सुधीर सल्होत्रा ने राज्यपाल का स्वागत किया। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश ऑप्थैल्मोलॉजिकल सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. राम लाल शर्मा, पालमपुर रोटरी आई फाउंडेशन के अध्यक्ष के.जी. बुटेल सहित कई चिकित्सक और प्रतिनिधि मौजूद रहे।
राज्यपाल ने सम्मेलन में शामिल चिकित्सकों और विशेषज्ञों से हिमाचल की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से भी परिचित होने का आग्रह किया। उन्होंने प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों के दर्शन करने का निमंत्रण देते हुए आयोजन से जुड़े सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं।