बिलासपुर,
हिमाचल प्रदेश के विभागों, बोर्डों और निगमों के 18 प्रमुख संगठनों से मिलकर गठित हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति की महत्वपूर्ण बैठक शुक्रवार को जिला परिषद हाल बिलासपुर में आयोजित हुई। प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर की अध्यक्षता में हुई बैठक में पेंशनरों की लंबित वित्तीय एवं अन्य मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में समिति ने प्रदेश सरकार को 15 दिन का समय देने का फैसला लिया है। समिति के अनुसार इस अवधि में सरकार पेंशनरों के प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए आमंत्रित करे। ऐसा नहीं होने पर अक्टूबर से प्रदेशभर में जनजागरण अभियान शुरू करने और चरणबद्ध आंदोलन करने की चेतावनी दी गई है।
लंबित देनदारियों के भुगतान की मांग
समिति ने छठे वेतन आयोग के संशोधित वेतनमान से जुड़े बकाया, पेंशन एरियर, ग्रेच्युटी, कम्यूटेशन और लीव इनकैशमेंट सहित विभिन्न लंबित देनदारियों के भुगतान की मांग उठाई।
इसके अलावा पेंशनरों ने 15 प्रतिशत महंगाई राहत/भत्ते के 195 माह के एरियर, लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति और तीन प्रतिशत महंगाई राहत का भुगतान करने की मांग भी रखी। समिति ने हर महीने की 10 तारीख से पहले पेंशन जारी करने तथा पेंशन से जुड़े मामलों का स्थायी समाधान करने की मांग की।
एचआरटीसी और स्थानीय निकाय पेंशनरों के मुद्दे भी उठाए
हिमाचल पथ परिवहन निगम के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अन्य विभागों के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की तर्ज पर 50 हजार रुपये की पहली किस्त देने की मांग की गई। समिति ने एचआरटीसी से संबंधित 2 अक्टूबर 1974 की अधिसूचना के नियमों को रद्द करने तथा निगम की परिसंपत्तियों को ‘स्टेट गवर्नमेंट ट्रांसपोर्ट’ में मर्ज कर इसे ‘ट्रांसपोर्ट’ का दर्जा देने की मांग भी रखी।
शहरी स्थानीय निकायों के पेंशनरों के संबंध में समिति ने कहा कि उन्हें वर्तमान में 1 जनवरी 2006 के वेतनमान के आधार पर पेंशन दी जा रही है। समिति ने छठे वेतन आयोग के आधार पर 1 जनवरी 2016 से संशोधित पेंशन देने की मांग की।
बिजली बोर्ड कर्मचारियों के लिए ओपीएस की मांग
बैठक में बिजली विभाग/बोर्ड के कर्मचारियों को अन्य विभागों की तर्ज पर पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) का लाभ देने की मांग भी उठाई गई।
पुलिस विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए सेना की तर्ज पर कैंटीन सुविधा, नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा और उनके आश्रितों के लिए पुलिस विभाग में भर्ती कोटा निर्धारित करने की मांग की गई।
वहीं, कॉरपोरेट सेक्टर के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के मामले में वर्ष 1999 की अधिसूचना को बहाल कर उन्हें पेंशन देने के संबंध में निर्णय लेने की मांग समिति ने रखी।
कम्यूटेशन संबंधी अधिसूचना वापस लेने की मांग
समिति ने 16 सितंबर 2026 को प्रदेश सरकार की ओर से जारी अधिसूचना पर भी आपत्ति जताई। समिति के अनुसार इस अधिसूचना में 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 तक के संशोधित कम्यूटेशन की अदायगी बंद किए जाने का प्रावधान है।
समिति ने इस अधिसूचना को तत्काल रद्द करने की मांग की। इसके साथ ही जीवन प्रमाण पत्र जमा करवाने के लिए केवल ऑनलाइन व्यवस्था पर निर्भरता समाप्त कर पुरानी व्यवस्था को भी जल्द बहाल करने की मांग की गई।
अक्टूबर से जनजागरण अभियान चलाने का निर्णय
समिति ने कहा कि यदि 15 दिन के भीतर सरकार की ओर से बातचीत के लिए प्रतिनिधिमंडल को नहीं बुलाया गया तो अक्टूबर से जिलों से लेकर ब्लॉक स्तर तक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।
समिति के अनुसार आवश्यकता पड़ने पर मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों का घेराव भी किया जाएगा। इसके बाद 12 नवंबर से प्रत्येक जिला मुख्यालय पर कम से कम 11 पेंशनरों को धरने पर बैठाने का निर्णय लिया गया है। अन्य पेंशनर धरने पर बैठे साथियों को सहयोग और समर्थन देंगे।
समिति ने कहा कि यह आंदोलन धर्मशाला में विधानसभा के शीतकालीन सत्र के शुरू होने तक जारी रखा जाएगा। इसके बाद विधानसभा घेराव का कार्यक्रम प्रस्तावित है। समिति के अनुसार यदि इसके बावजूद सरकार मांगों पर कार्रवाई नहीं करती है तो शिमला में आमरण अनशन और सचिवालय घेराव जैसे कदम भी उठाए जाएंगे।
18 संगठनों के पदाधिकारी पेंशनरों को करेंगे जागरूक
बैठक में तय किया गया कि जिला संयोजक, प्रदेश कार्यकारिणी के पदाधिकारी और 18 संबद्ध संगठनों के पदाधिकारी अपने-अपने स्तर पर पेंशनरों को आगामी आंदोलन की जानकारी देंगे और उन्हें इसमें शामिल होने के लिए तैयार करेंगे।
बैठक का संचालन हिमाचल प्रदेश संयुक्त संघर्ष समिति के अतिरिक्त सेक्रेटरी जनरल भूप राम वर्मा ने किया। इस दौरान इन्द्र पाल शर्मा, बृजलाल ठाकुर, हिम्मत राम शर्मा, चेत राम वर्मा, रविन्द्र सिंह राणा, मोहन सिंह ठाकुर, हरमेश सिंह राणा, डी.एस. धतवालिया, देवी लाल ठाकुर, देव राज शर्मा, विनोद सूद, सुरेन्द्र ठाकुर, शिव सिंह सैन, बलराम पुरी, प्रभु राम वर्मा, सेठ राम, नरेंद्र शर्मा, जसवंत धीमान, सेन राम नेगी, हेम सिंह ठाकुर, सुशील पुंडीर, रूमा चंदेल, संदेश शर्मा, जय कृष्ण शर्मा, मनोहर ठाकुर और सुभाष पठानिया सहित अन्य पदाधिकारियों ने अपने विचार रखे।