शिमला,
राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस), राष्ट्रपति निवास शिमला में आयोजित पांच दिवसीय कांगड़ा लघु चित्रकला कला शिविर के दौरान तैयार की गई कलाकृतियों की प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कांगड़ा लघु चित्रकला भारतीय कला की महान परंपराओं का गौरवशाली प्रतीक है और इसकी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
राज्यपाल ने कहा कि कांगड़ा लघु चित्रकला अपनी सौंदर्यात्मक उत्कृष्टता, सूक्ष्म शिल्पकला और कलात्मक परिष्कार के कारण विश्वभर में विशिष्ट पहचान रखती है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक चित्रकला शैली नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत स्वरूप है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाना आवश्यक है।
उन्होंने भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान लंबे समय से उच्च शिक्षा, शोध और भारतीय संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ऐसे कला शिविर पारंपरिक कला रूपों को नई पीढ़ी से जोड़ने और कलाकारों को प्रोत्साहन देने का प्रभावी माध्यम हैं।
राज्यपाल ने कहा कि आधुनिक दौर में पारंपरिक कलाएं अनेक चुनौतियों का सामना कर रही हैं, ऐसे में कलाकार और शिल्पकार हमारी सांस्कृतिक धरोहर के वास्तविक संरक्षक हैं। उन्होंने सरकार, शैक्षणिक संस्थानों, कलाकारों और समाज से मिलकर पारंपरिक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए संयुक्त प्रयास करने का आह्वान किया।
उन्होंने कांगड़ा लघु चित्रकला के स्वर्णिम इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि महाराजा संसार चंद के संरक्षण में इस कला शैली ने अपने उत्कर्ष को प्राप्त किया था। उन्होंने संस्थान परिसर में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए चिनार का पौधा भी रोपा।
इस अवसर पर भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. हिमांशु चतुर्वेदी ने राज्यपाल का स्वागत करते हुए संस्थान की गतिविधियों की जानकारी दी। वरिष्ठ कलाकार धनी राम ने भी स्वदेशी कलात्मक परंपराओं के संरक्षण पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष रामेश्वर सिंह ठाकुर, प्रख्यात कलाकार, विद्वान और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।