शिमला,
हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम लिमिटेड (एचपीएमसी) को आधुनिक और अधिक व्यावसायिक रूप देने की दिशा में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जनशिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में हुई निगम के निदेशक मंडल की 222वीं बैठक में प्रसंस्करण संयंत्रों के आधुनिकीकरण, डिजिटल सेवाओं, नए विपणन चैनलों और देश-विदेश के बाजारों में विस्तार से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
बैठक में एचपीएमसी की मौजूदा कार्यप्रणाली, व्यावसायिक गतिविधियों और विकास योजनाओं की समीक्षा करते हुए ऐसे कदमों पर चर्चा की गई, जिनसे प्रदेश के फल उत्पादकों और बागवानों को बेहतर बाजार उपलब्ध करवाया जा सके।
खाद्य प्रसंस्करण संयंत्रों के आधुनिकीकरण पर 1.69 करोड़ खर्च होंगे
निदेशक मंडल ने एचपीएमसी के खाद्य प्रसंस्करण संयंत्रों के आधुनिकीकरण और उन्नयन को प्राथमिकता दी है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रसंस्करण क्षमता को बेहतर करने के साथ उत्पादों की गुणवत्ता, मूल्यवर्धन और उपलब्ध आधारभूत ढांचे के प्रभावी इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
इस योजना के तहत एचपीएमसी के उत्पादों की ब्रांडिंग, प्रचार और मार्केटिंग व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा। इसके लिए करीब 1.69 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत निर्धारित की गई है। निगम की कोशिश घरेलू बाजार के साथ नए उभरते बाजारों में भी अपने उत्पादों की पहुंच बढ़ाने की है।
पराला में 8.19 करोड़ से बनेगा एप्पल सनैप्स प्लांट
बैठक में एचपीएमसी के खाद्य प्रसंस्करण संयंत्र पराला में एप्पल सनैप्स संयंत्र स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस परियोजना पर लगभग 8.19 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
इस संयंत्र के माध्यम से प्रदेश में उत्पादित सेब के बेहतर उपयोग और प्रसंस्करण के लिए अतिरिक्त अवसर विकसित किए जाएंगे। साथ ही सेब आधारित उत्पादों में मूल्यवर्धन को बढ़ावा देकर बागवानी उपज के विविध उपयोग की संभावनाओं को मजबूत करने पर जोर रहेगा।
हिमाचल से बाहर खुलेंगे एचपीएमसी के कियोस्क
एचपीएमसी के उत्पादों को प्रदेश से बाहर अधिक उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए निदेशक मंडल ने नई कियोस्क नीति को भी मंजूरी दी है।
इसके तहत देश के विभिन्न हिस्सों में उपयुक्त स्थानों पर एचपीएमसी के कियोस्क स्थापित किए जा सकेंगे। इससे निगम को अतिरिक्त विपणन चैनल मिलने के साथ उसके उत्पादों की राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच और ब्रांड पहचान बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
बागवानों के रिकॉर्ड होंगे और अधिक डिजिटल
बैठक में बागवानों से जुड़े रिकॉर्ड और प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण पर भी विशेष जोर दिया गया। एचपीएमआईएम वेब पोर्टल और मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से डिजिटल व्यवस्था को आगे बढ़ाने के प्रयासों की समीक्षा की गई।
डिजिटल प्रणाली से किसानों और बागवानों के व्यक्तिगत रिकॉर्ड तैयार करने तथा उन्हें व्यवस्थित रूप से सुरक्षित रखने की सुविधा मिली है। इससे मामलों के निस्तारण में पारदर्शिता और गति बढ़ाने में मदद मिल रही है।
निदेशक मंडल ने माना कि यह व्यवस्था भविष्य में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को आसान बनाने के साथ मैनुअल रिकॉर्ड पर निर्भरता कम करने में भी उपयोगी होगी। साथ ही रिकॉर्ड की ट्रेसबिलिटी, जवाबदेही और कार्यकुशलता को मजबूत किया जा सकेगा।
निष्क्रिय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर विचार
एचपीएमसी की ऐसी संपत्तियों और सुविधाओं को भी उपयोग में लाने की योजना पर चर्चा हुई, जो वर्तमान में निष्क्रिय हैं या उनका सीमित इस्तेमाल हो रहा है। इन परिसंपत्तियों के मॉनेटाइजेशन और अधिकतम उपयोग के विकल्पों की समीक्षा की गई।
बैठक में मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के जरिए निगम की संपत्तियों का बेहतर व्यावसायिक उपयोग करने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।
इसका उद्देश्य अतिरिक्त राजस्व जुटाने, संपत्तियों की उपयोगिता बढ़ाने और निष्क्रिय ढांचे के रखरखाव पर आने वाले वित्तीय भार को कम करना है। साथ ही निगम के संस्थागत और व्यावसायिक हितों को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया।
देश के साथ विदेशी बाजारों में भी पहुंच बढ़ाने की तैयारी
निदेशक मंडल ने एचपीएमसी के उत्पादों को देश के व्यापक बाजारों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए आवश्यक रणनीति पर भी चर्चा की।
इसके तहत संभावित बाजारों की पहचान, उत्पादों की ब्रांड पोजिशनिंग, मार्केटिंग रणनीति और निर्यात संपर्क विकसित करने पर काम किया जा रहा है। उद्योग मंचों, बिजनेस मीट्स और संबंधित आयोजनों में एचपीएमसी की भागीदारी बढ़ाने से नए व्यापारिक संपर्क और संभावित साझेदारियां विकसित करने की योजना है।
बागवानों को सीधे लाभ पहुंचाना लक्ष्य: जगत सिंह नेगी
बैठक की अध्यक्षता करते हुए जगत सिंह नेगी ने कहा कि एचपीएमसी की सभी योजनाओं का अंतिम उद्देश्य बागवानी क्षेत्र में मूल्यवर्धन, बेहतर बाजार पहुंच और नए व्यावसायिक अवसर पैदा करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन पहलों का प्रत्यक्ष और दीर्घकालिक लाभ प्रदेश के किसानों और बागवानों तक पहुंचना जरूरी है।
निदेशक मंडल ने एचपीएमसी को आधुनिक, दक्ष, व्यावसायिक रूप से सक्षम और किसान-बागवान केंद्रित संगठन के रूप में विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इसके लिए प्रसंस्करण एवं विपणन क्षमता मजबूत करने, डिजिटल तकनीक अपनाने और नए घरेलू व अंतरराष्ट्रीय बाजार तलाशने पर लगातार काम करने पर जोर दिया गया।
ये रहे मौजूद
बैठक में एचपीएमसी उपाध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार शर्मा, सचिव बागवानी सी. पॉलरासू, प्रबंध निदेशक डी.सी. राणा, विशेष सचिव वित्त विजय वर्धन, निदेशक बागवानी सतीश कुमार सहित निदेशक मंडल के अन्य सदस्य और संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।