शिमला,
नई दिल्ली के भारत मंडपम में केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में हिमाचल प्रदेश ने करदाताओं की सुविधा, राजस्व संरक्षण और पर्वतीय राज्यों की विशेष आवश्यकताओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। प्रदेश सरकार ने जीएसटी व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए प्रस्तावित सुधारों का समर्थन किया, साथ ही राजस्व हितों की सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया।
हिमाचल सरकार ने पंजीकरण, रिटर्न दाखिल करने, रिफंड, आकलन और न्यायनिर्णयन सहित जीएसटी से जुड़ी विभिन्न प्रक्रियाओं को आसान बनाने के प्रस्तावों का स्वागत किया। राज्य का कहना है कि इन सुधारों से वास्तविक करदाताओं के लिए अनुपालन प्रक्रिया अधिक सुगम होगी और कर व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी।
छोटे करदाताओं और सीएसडी कैंटीन से जुड़े प्रस्तावों का स्वागत
बैठक में हिमाचल प्रदेश ने छोटे करदाताओं को राहत देने वाले प्रस्तावों का भी समर्थन किया। इसके साथ ही रक्षा प्रतिष्ठानों और सीएसडी कैंटीन से संबंधित उपायों का स्वागत किया गया।
राज्य से संबंधित टोल वसूली के अधिकार की लीज के मुद्दे पर भी परिषद की बैठक में चर्चा हुई। हिमाचल प्रदेश ने राज्य की टोल संग्रहण व्यवस्था से जुड़े प्रस्तावित जीएसटी छूट प्रावधान का स्वागत किया।
अनुपालन में आसानी के साथ राजस्व सुरक्षा पर जोर
हिमाचल प्रदेश ने कहा कि जीएसटी सुधारों का उद्देश्य वास्तविक करदाताओं के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाना होना चाहिए, लेकिन इसके साथ प्रभावी कर प्रवर्तन और राजस्व संरक्षण का संतुलन भी जरूरी है।
राज्य ने स्पष्ट किया कि ऐसे प्रावधानों पर सावधानी से विचार किया जाना चाहिए, जिनसे कर प्रवर्तन कमजोर होने, कर चोरी या धोखाधड़ी को बढ़ावा मिलने अथवा वैध राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका हो। प्रदेश ने जोर दिया कि करदाता सुविधा बढ़ाने के साथ राजस्व सुरक्षा और कर चोरी की रोकथाम से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
जीएसटी से हुए राजस्व नुकसान के लिए मुआवजे की मांग
हिमाचल प्रदेश ने जीएसटी लागू होने के बाद राज्य के राजस्व पर पड़े प्रभाव की भरपाई का मुद्दा भी परिषद के समक्ष रखा। राज्य ने मांग की कि उसकी वित्तीय स्थिरता को ध्यान में रखते हुए राजस्व संरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
प्रदेश ने पांच वर्षों तक वर्ष-दर-वर्ष 14 प्रतिशत राजस्व वृद्धि के आधार पर संरक्षित राजस्व सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही यह भी कहा गया कि पांच वर्ष की अवधि के बाद भी राजस्व संरक्षण की व्यवस्था तब तक जारी रहनी चाहिए, जब तक राज्य का वास्तविक राजस्व पांचवें वर्ष के लिए निर्धारित संरक्षित राजस्व के स्तर तक नहीं पहुंच जाता।
पर्वतीय राज्यों के लिए अलग मंत्रियों के समूह की मांग
हिमाचल ने पर्वतीय राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियों और विशिष्ट आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए इन राज्यों की समस्याओं के समाधान के लिए अलग से मंत्रियों के समूह के गठन की मांग को दोहराया। राज्य का कहना है कि पर्वतीय राज्यों की आवश्यकताएं मैदानी राज्यों से अलग हैं, इसलिए जीएसटी व्यवस्था में उनकी विशेष परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
एपीआई पर कर दर घटाने की जरूरत बताई
बैठक में हिमाचल प्रदेश ने फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में रेट इनवर्जन की समस्या का मुद्दा भी उठाया। राज्य ने सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री यानी एपीआई पर कर की दर कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रदेश के अनुसार, इससे इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही इनपुट टैक्स क्रेडिट के जमा होने और उससे जुड़े रिफंड दावों में भी कमी आ सकती है। इससे देश में एपीआई के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलने के साथ फार्मास्यूटिकल उद्योग को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
बैठक में हिमाचल प्रदेश की ओर से सचिव राज्य कर एवं आबकारी डॉ. यूनुस, आयुक्त राज्य कर एवं आबकारी डॉ. अश्वनी कुमार शर्मा, अतिरिक्त आयुक्त रविन्द्र कुमार, संयुक्त आयुक्त कुलभूषण गौतम तथा परियोजना प्रबंधक नवीन गर्ग उपस्थित रहे।