लिल्ह कोठी (चंबा),
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और गांवों में रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर पैदा करने के लिए कृषि, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन के क्षेत्र में कई नई पहल कर रही है। सरकार का लक्ष्य समाज के हर वर्ग तक विकास का लाभ पहुंचाना और हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाना है।
मुख्यमंत्री ने बुधवार को चंबा जिले के भरमौर विधानसभा क्षेत्र के लिल्ह कोठी में आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। इस दौरान उन्होंने होली-उत्तराला सड़क निर्माण के लिए 18 करोड़ रुपये जारी करने तथा भरमौर क्षेत्र के लिल्ह, मैहला, भरमौर, सुनारा और होली के विद्यालयों को सीबीएसई से संबद्ध करने की घोषणा की। इन स्कूलों में आगामी शैक्षणिक सत्र से सीबीएसई पाठ्यक्रम के तहत दाखिले होंगे। इसके लिए शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने व्यवस्था परिवर्तन के संकल्प के साथ अनाथ बच्चों, विधवाओं, एकल महिलाओं, किसानों, बागवानों और युवाओं के कल्याण के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कृषि, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि गांवों में ही लोगों को आजीविका के बेहतर साधन उपलब्ध हों, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।
आपदा प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए बढ़ाई आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रदेश में आई प्राकृतिक आपदा का जिक्र करते हुए कहा कि उनके मुख्यमंत्री बनने के छह महीने बाद ही हिमाचल को भीषण आपदा का सामना करना पड़ा। उस दौरान राज्य सरकार ने अपने स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य किए और 75 हजार से अधिक पर्यटकों को सुरक्षित उनके घरों तक पहुंचाया। इसके साथ ही बिजली और पेयजल आपूर्ति बहाल करने के लिए भी तेजी से काम किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री द्वारा राज्य के लिए घोषित 1,500 करोड़ रुपये की सहायता अब तक नहीं मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने अपने संसाधनों से प्रभावित परिवारों के लिए विशेष राहत पैकेज लागू किया। इसके तहत पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के पुनर्निर्माण के लिए सहायता राशि 1.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 8.50 लाख रुपये की गई। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन प्रयासों की विश्व बैंक और नीति आयोग ने भी सराहना की है।
राजनीतिक संकट को लेकर भाजपा पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में आए राजनीतिक संकट का उल्लेख करते हुए भाजपा पर कांग्रेस विधायकों को अपने पक्ष में करने और जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। उन्होंने भाजपा की मौजूदा पदयात्रा पर भी सवाल उठाए और कहा कि लोकतंत्र तथा वोट के अधिकार की रक्षा के लिए कांग्रेस ने ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।
शिक्षा में हिमाचल पांचवें स्थान पर पहुंचा: मुख्यमंत्री
शिक्षा क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणात्मक शिक्षा के मामले में हिमाचल प्रदेश देशभर में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि उस समय प्रदेश शिक्षा रैंकिंग में 21वें स्थान पर था।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी बेहतर शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ा जा रहा है, ताकि राज्य बोर्ड और सीबीएसई के विद्यार्थियों के बीच शैक्षणिक अवसरों का अंतर कम किया जा सके।
किशाऊ परियोजना से 3,000 करोड़ रुपये बचाने का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने के बावजूद प्रदेश सरकार अपने संसाधन बढ़ाने और राज्य के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए प्रयासरत है। उन्होंने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने अपनी शर्तों पर समझौता ज्ञापन कर 3,000 करोड़ रुपये बचाए हैं। परियोजना पूरी होने के बाद वर्ष 2032 से राज्य को सालाना 1,500 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने वाइल्ड फ्लावर हॉल मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को भी प्रदेश के पक्ष में बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस मामले से राज्य को 401 करोड़ रुपये की आय हुई है और आगामी 30 वर्षों में लगभग 1,200 करोड़ रुपये की आमदनी होने का अनुमान है।
6,000 अनाथ बच्चों को सुख-आश्रय योजना का लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के तहत 27 वर्ष तक की आयु के लगभग 6,000 अनाथ बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यकताओं का खर्च प्रदेश सरकार उठा रही है। योजना के अंतर्गत पात्र बच्चों को गृह निर्माण और विवाह के लिए भी आर्थिक सहायता दी जा रही है।
वहीं, मुख्यमंत्री सुख शिक्षा योजना के माध्यम से विधवा महिलाओं के बच्चों की व्यावसायिक शिक्षा का खर्च भी सरकार वहन कर रही है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार जल्द ही ‘मुख्यमंत्री का अपना परिवार सुखी परिवार योजना’ शुरू करने जा रही है। इसके तहत 75 हजार रुपये से कम वार्षिक आय वाले परिवारों की 21 से 59 वर्ष तक की महिलाओं को 1,500 रुपये मासिक सहायता, 300 यूनिट मुफ्त बिजली और 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध करवाने का प्रस्ताव है। इस योजना से तीन लाख से अधिक परिवारों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
भरमौर की 27 पंचायतों को जनजातीय दर्जा देने के लिए बनेगी कमेटी
मुख्यमंत्री ने भरमौर विधानसभा क्षेत्र की 27 ग्राम पंचायतों को जनजातीय दर्जा देने के मामले को केंद्र सरकार के समक्ष उठाने के लिए एक कमेटी गठित करने की घोषणा की। उन्होंने चूड़ी, चड़ी, अनानैहर, ग्रूंडी और कुनेड़ स्कूलों को स्तरोन्नत करने का भी ऐलान किया।
इसके अलावा भरमौर विधानसभा क्षेत्र में उपयुक्त स्थान पर हेलीपैड बनाने की संभावनाओं पर विचार करने का आश्वासन दिया। होली-उत्तराला सड़क के लिए 18 करोड़ रुपये जारी करने की घोषणा को भी क्षेत्र के सड़क संपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस अवसर पर एपीएमसी चंबा के अध्यक्ष ललित ठाकुर ने क्षेत्र के विकास के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया और विभिन्न मांगें उनके समक्ष रखीं। प्रदेश कांग्रेस महासचिव अमित भरमौरी और चंबा जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुरजीत चौधरी ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया।
कार्यक्रम में विधायक नीरज नैय्यर, पूर्व मंत्री आशा कुमारी, वूल फेडरेशन के अध्यक्ष मनोज ठाकुर, अनुसूचित जाति एवं जनजाति निगम के अध्यक्ष लाल सिंह कौशल और जिला परिषद अध्यक्ष रेखा ठाकुर सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।