शिमला,
मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने कहा कि राज्य सरकार सरकारी कर्मचारियों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री से आज हिमाचल प्रदेश साइंस मास्टर्स एसोसिएशन (एचपीएसएमए) के प्रतिनिधिमंडल ने हमीरपुर जिला अध्यक्ष विकास कौशल के नेतृत्व में शिष्टाचार भेंट की। प्रतिनिधिमंडल ने टीजीटी शिक्षकों को हेडमास्टर और प्रवक्ता पदों पर पदोन्नति देने की मांग मुख्यमंत्री के समक्ष रखी।
मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने मंत्रिमंडल की पहली बैठक में ही सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) लागू करने का दबाव बनाए जाने के बावजूद हिमाचल सरकार हर परिस्थिति में ओपीएस को जारी रखेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ओपीएस लागू करने के निर्णय के बाद केंद्र सरकार ने राज्य की 1600 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता रोक दी। इसके साथ ही वर्ष 1952 से मिल रहा राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) भी बंद कर दिया गया, जिससे राज्य को हर वर्ष 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार को राजस्व घाटा अनुदान के तहत 54,000 करोड़ रुपये और जीएसटी मुआवजे के रूप में 16,000 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे, जबकि वर्तमान सरकार को आरडीजी के रूप में केवल 17,000 करोड़ रुपये मिले हैं। इसके बावजूद राज्य सरकार विकास कार्यों को प्रभावित नहीं होने दे रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार वित्तीय चुनौतियों के बावजूद प्रदेश के विकास और कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता दे रही है।