कुल्लू,
ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में आज सप्ताहभर चलने वाले अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का विधिवत शुभारंभ राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने किया। भगवान रघुनाथ जी की पारंपरिक रथयात्रा के साथ शुरू हुए इस उत्सव में कुल्लू घाटी के विभिन्न क्षेत्रों से 347 से अधिक देवी-देवताओं ने भाग लिया। इस अवसर पर लेडी गवर्नर बिंदु गुप्ता भी मौजूद रहीं।
राज्यपाल ने प्रदेशवासियों को दशहरा उत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कुल्लू दशहरा हिमाचल की देव संस्कृति, लोक परंपराओं, सामूहिक आस्था और सामाजिक समरसता का अनूठा संगम है। उन्होंने कहा कि देव और लोक संस्कृति का यह मेल उत्सव को विशिष्ट पहचान देता है और देश के सांस्कृतिक मानचित्र पर कुल्लू दशहरा का विशेष स्थान है।
परंपराएं हमारी विरासत ही नहीं, भविष्य का मार्गदर्शन भी
राज्यपाल ने कहा कि परंपराएं केवल अतीत से जुड़ी धरोहर नहीं हैं, बल्कि वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए सामर्थ्य और मार्गदर्शन का स्रोत भी हैं। इसलिए देव परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण कर उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि कुल्लू दशहरा इस विरासत को जीवंत रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है, जहां सदियों पुरानी परंपराएं आज भी जनजीवन का हिस्सा बनी हुई हैं।
श्रीराम का जीवन देता है सत्य और न्याय का संदेश
विजयादशमी के महत्व का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन समाज को सत्य, कर्तव्य, त्याग, न्याय और धर्म के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने लोगों से नशाखोरी, हिंसा, भ्रष्टाचार और समाज में वैमनस्य पैदा करने वाली शक्तियों के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक बुराइयों का मुकाबला सामूहिक प्रयासों से ही किया जा सकता है।
‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना अपनाने का आह्वान
राज्यपाल ने नागरिकों से राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता को मजबूत करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकता है। आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने से ही देश और समाज को मजबूती मिलेगी।
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने विकसित भारत 2047 के संकल्प को आर्थिक समृद्धि, तकनीकी प्रगति, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा भारत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी
राज्यपाल ने हिमाचल की प्राकृतिक संपदा के संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पर्वत, वन, नदियां और जैव विविधता अमूल्य धरोहर हैं। हिमाचल की देव परंपराएं भी प्रकृति के प्रति सम्मान और सह-अस्तित्व का संदेश देती हैं।
उन्होंने कहा कि विकास की प्रक्रिया के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके।
पर्यटन और स्थानीय कारोबार को मिलेगा बढ़ावा
राज्यपाल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने का प्रभावी मंच बन चुका है। उत्सव के माध्यम से पर्यटन के साथ स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पादों, रोजगार और उद्यमिता को भी बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने कहा कि उत्सव से होने वाले आर्थिक लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचने चाहिए। इसके साथ ही आयोजन की पारंपरिक पहचान और प्रामाणिकता को भी बनाए रखना जरूरी है।
युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील
राज्यपाल ने प्रदेश के युवाओं से नशे से दूर रहने और अपनी ऊर्जा सकारात्मक गतिविधियों में लगाने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से नए कौशल सीखने, तकनीक एवं नवाचार को अपनाने, पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने की अपील की।
उन्होंने विश्वास जताया कि अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा आने वाले समय में आस्था, सांस्कृतिक गौरव, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता की भावना को और मजबूत करेगा। साथ ही यह उत्सव देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के सामने हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करता रहेगा।
राज्यपाल ने भगवान रघुनाथ जी से हिमाचल प्रदेश सहित पूरे देश की शांति, समृद्धि और जनकल्याण की कामना की।
विभिन्न प्रदर्शनियों का किया उद्घाटन
उत्सव के शुभारंभ के बाद राज्यपाल ने विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और गैर-सरकारी संगठनों की ओर से लगाई गई प्रदर्शनियों का उद्घाटन किया। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया और वहां प्रदर्शित उत्पादों एवं सामग्री की जानकारी ली।
इससे पहले कुल्लू पहुंचने पर राज्यपाल का भव्य स्वागत किया गया।
इस अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल, पूर्व सांसद एवं हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल, विधायक एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार, विधायक सुंदर सिंह ठाकुर, भुवनेश्वर गौड़, लोकेन्द्र कुमार, सुरेंद्र शौरी, उपायुक्त अमित कुमार शर्मा, पुलिस अधीक्षक अभिषेक एस. सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।