शिमला,
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने समग्र शिक्षा के तहत आयोजित यूनेस्को ‘एचपी फ्यूचर्स’ परियोजना की संचालन समिति की तीसरी बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार चुनौतियों के बावजूद गुणवत्तापूर्ण और विश्वस्तरीय शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में शुरू की गई यह परियोजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और राष्ट्रीय करिकुलम फ्रेमवर्क-2023 के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार करना, जलवायु-संवेदनशील विद्यालय विकसित करना तथा समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देना है।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि परियोजना तीन प्रमुख स्तंभों—कौशल आधारित शिक्षा, खेलों के माध्यम से नैतिक मूल्य शिक्षा और हरित शिक्षा—पर आधारित है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों में सृजनात्मक सोच, नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क, अनुशासन और पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक भी शहरी क्षेत्रों जैसी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। लगभग 200 शिक्षकों को खेल आधारित नैतिक शिक्षा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है तथा ईको-क्लबों को सशक्त बनाया गया है, जिससे विद्यार्थियों की पर्यावरणीय गतिविधियों में भागीदारी बढ़ी है।
रोहित ठाकुर ने जानकारी दी कि सुधारों की शुरुआत 12 पीएम श्री विद्यालयों से की जाएगी, इसके बाद इसे 99 विद्यालयों तक विस्तारित कर पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। उन्होंने हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड, एससीईआरटी और डाइट के बीच बेहतर समन्वय तथा नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यूनेस्को की सिफारिशें केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि शिक्षण पद्धति और सीखने के परिणामों में वास्तविक सुधार के रूप में दिखाई दें। समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष बल देते हुए उन्होंने कहा कि यूनेस्को के सहयोग से हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में आदर्श राज्य बन सकता है।
बैठक में शिक्षा सचिव राकेश कंवर, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली, समग्र शिक्षा के परियोजना निदेशक राजेश शर्मा, यूनेस्को प्रतिनिधि तथा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।