शिमला,
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय शिमला में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘भारत में कर सुधारः चुनौतियां और संभावनाएं’ का शुभारम्भ किया।
राज्यपाल ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद और विशेष रूप से उदारीकरण के पश्चात भारत की कर प्रणाली में व्यापक सुधार हुए हैं, जिससे कर ढांचा अधिक सरल, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बना है। उन्होंने डिजिटलीकरण, फेसलेस असेसमेंट, ऑनलाइन अपील, सरल रिटर्न प्रक्रिया और करदाता चार्टर जैसी पहलों को कर प्रणाली में विश्वास बढ़ाने वाला बताया।
उन्होंने कहा कि ‘विवाद से विश्वास’ जैसी योजनाएं कर संग्रह में सहभागितापूर्ण दृष्टिकोण को दर्शाती हैं, लेकिन कर आधार का विस्तार, कर चोरी पर नियंत्रण, डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़ी जटिलताओं का समाधान और वैश्विक कर प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाए रखना अभी भी बड़ी चुनौतियां हैं।
राज्यपाल ने आचार्य चाणक्य के अर्थशास्त्र का उल्लेख करते हुए कहा कि कर व्यवस्था न्यायसंगत, संतुलित और लोक-कल्याणकारी होनी चाहिए, ताकि नागरिकों पर अनावश्यक बोझ न पड़े और उत्पादन व समृद्धि को बढ़ावा मिले।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रीति सक्सेना ने राज्यपाल का स्वागत करते हुए सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की। मुख्य वक्ता प्रो. निगम नुग्गेहल्ली (एनएलएसआईयू बेंगलुरु) ने कहा कि जीएसटी जैसे बड़े कर सुधारों को बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था के अनुरूप निरंतर विकसित करने की आवश्यकता है। सम्मेलन संयोजक प्रो. गिरिजेश शुक्ला ने फेसलेस असेसमेंट और एआई आधारित विश्लेषण के माध्यम से कर प्रणाली के आधुनिकीकरण पर जोर दिया।
इससे पूर्व राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में नव-डिजाइन लिटिगेशन लैब का उद्घाटन किया तथा यूथ रेड क्रॉस द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर का शुभारम्भ भी किया। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष कैप्टन रामेश्वर सिंह ठाकुर सहित शिक्षाविद, छात्र और गणमान्य उपस्थित रहे।