एसजेवीएन अधिकारियों और कर्मचारियों से नशे के खिलाफ अभियान का एंबैस्डर बनने की अपील
शिमला,
हिमाचल प्रदेश में चिट्टे के खिलाफ चलाए जा रहे एंटी-चिट्टा जन आंदोलन को व्यापक जनभागीदारी के जरिए मजबूत बनाने का आह्वान करते हुए पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने एसजेवीएन के अधिकारियों और कर्मचारियों से इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है।
डीजीपी अशोक तिवारी शिमला स्थित एसजेवीएन मुख्यालय में सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2026 के तहत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू का संदेश साझा करते हुए कहा कि चिट्टे के खिलाफ प्रभावी लड़ाई के लिए परिवारों, शिक्षण संस्थानों, कार्यस्थलों और सामाजिक संगठनों को मिलकर प्रयास करने होंगे।
15 नवंबर 2025 को रिज मैदान से शुरू हुआ था अभियान
अशोक तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री की परिकल्पना के अनुरूप 15 नवंबर 2025 को शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान से एंटी-चिट्टा जन आंदोलन की शुरुआत की गई थी। इसका उद्देश्य नशे के खिलाफ कार्रवाई को केवल सरकारी अभियान तक सीमित रखने के बजाय इसे निरंतर चलने वाले जन आंदोलन में बदलना है।
उन्होंने एसजेवीएन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से इस अभियान का एंबैस्डर बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपने कार्यस्थल के साथ-साथ परिवार और समुदाय में भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक कर सकते हैं।
डीजीपी ने विशेष रूप से युवाओं को नशे से दूर रखने, परिवारों को अभियान से जोड़ने और नशे की लत से जूझ रहे लोगों के प्रति संवेदनशीलता एवं सहयोग का भाव रखने पर जोर दिया। उन्होंने नागरिकों से नशा तस्करी से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी पुलिस के साथ साझा करने की अपील भी की।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के एंटी-चिट्टा जन आंदोलन पर आधारित जागरूकता वीडियो भी प्रदर्शित किया गया।
ईआरएसएस-112 के प्रदर्शन में हुआ सुधार
पुलिस महानिदेशक ने हिमाचल प्रदेश पुलिस की आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ईआरएसएस-112) के प्रदर्शन में हुए सुधार की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि नवंबर 2025 में राष्ट्रीय स्तर पर 34वें स्थान पर रही यह सेवा अब प्रथम स्थान पर पहुंच गई है।
उन्होंने एसजेवीएन कर्मचारियों से आपातकालीन हेल्पलाइन 112 और इसकी ‘ट्रैक मी’ सुविधा के बारे में आम लोगों को जागरूक करने का आग्रह किया, ताकि जरूरत के समय लोगों को समय पर सहायता मिल सके।
सतर्कता और पारदर्शिता पर भी दिया जोर
सतर्कता जागरूकता सप्ताह की थीम ‘समृद्धि के लिए सत्यनिष्ठा’ पर बोलते हुए अशोक तिवारी ने निवारक सतर्कता, पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया और नैतिक नेतृत्व के महत्व को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि ईमानदार अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और उन्हें अनावश्यक जांच या कार्रवाई के भय से मुक्त वातावरण उपलब्ध होना चाहिए।
डीजीपी ने कहा कि नशामुक्त हिमाचल प्रदेश का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है, जब समाज का प्रत्येक नागरिक एंटी-चिट्टा जन आंदोलन का सक्रिय भागीदार बने। उन्होंने सामूहिक प्रयासों के माध्यम से नशे के खिलाफ जागरूकता का संदेश घर-घर और समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का आह्वान किया।