शिमला।
जिला शिमला लेक्चरर एसोसिएशन के प्रधान दविंदर लक्टू की अध्यक्षता में आयोजित सर्व अध्यापक संघ/जॉइंट टीचिंग फेडरेशन के जनरल हाउस में शिक्षकों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में अजय नेगी सहित विभिन्न पदाधिकारी मौजूद रहे, जबकि चौपाल, कोटखाई, जुब्बल, रोहड़ू, रामपुर, ननखड़ी और शिमला शहरी क्षेत्र के सैकड़ों शिक्षक शामिल हुए।
बैठक का मुख्य केंद्र राज्य सरकार द्वारा चयनित विद्यालयों को Central Board of Secondary Education से संबद्ध करने के निर्णय और अलग CBSE कैडर बनाए जाने के प्रावधान पर रहा। शिक्षकों ने कहा कि CBSE से संबद्धता का विचार सकारात्मक हो सकता है, लेकिन अलग कैडर व्यवस्था से कर्मचारियों में असुरक्षा और असंतोष बढ़ेगा तथा एक ही सरकार के अंतर्गत दो बोर्ड और दो कैडर प्रणाली से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी।
शिक्षकों ने 30–35 वर्षों का अनुभव रखने वाले अध्यापकों को CBSE स्कूलों में जाने के लिए पुनः परीक्षा अनिवार्य किए जाने पर भी कड़ा विरोध जताया। उनका कहना था कि लंबे अनुभव के बावजूद दोबारा परीक्षा देना उनके योगदान पर प्रश्नचिह्न लगाता है और वरिष्ठता समाप्त होने की आशंका पैदा करता है।
बैठक में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा दिए गए आश्वासन के बावजूद अधिसूचना में वरिष्ठता संरक्षण से जुड़े बिंदु न हटाए जाने पर भी नाराजगी जताई गई। वहीं 22 मार्च को प्रस्तावित शिक्षक चयन परीक्षा की तिथि पर आपत्ति दर्ज करते हुए कहा गया कि उसी समय हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं भी संचालित होती हैं, जिससे व्यवस्था प्रभावित होगी।
शिक्षकों ने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता, विद्यालय विकल्प देने और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग उठाई। बैठक में JBT, C&V, TGT, प्रवक्ता, मुख्याध्यापक और प्रधानाचार्य वर्ग के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से निर्णय का विरोध करते हुए शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।