बिलासपुर,
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य हिमाचल प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रदेशवासियों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं राज्य के भीतर ही उपलब्ध हों और इनका लाभ दूरदराज तथा दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक भी पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने यह बात एम्स बिलासपुर के प्रथम दीक्षांत समारोह में कही। उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का हिमाचल प्रदेश में स्वागत करते हुए प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल को देवभूमि के साथ-साथ वीरभूमि के रूप में भी जाना जाता है। यहां के मंदिर, लोक परंपराएं और सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत प्रदेश को विशिष्ट पहचान देती हैं।
उन्होंने बिलासपुर के विकास और भाखड़ा बांध परियोजना से जुड़े इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र के लोगों ने विकास और राष्ट्र निर्माण के लिए विस्थापन का दर्द भी सहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाखड़ा बांध देश की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा होने के साथ बिलासपुर के लोगों के त्याग और योगदान की भी याद दिलाता है।
सरकारी अस्पतालों में आधुनिक डायग्नॉस्टिक सुविधाओं का विस्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 3-टेस्ला एमआरआई, पीईटी स्कैन, उच्च क्षमता वाली एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड मशीनों जैसी आधुनिक डायग्नॉस्टिक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह है कि अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहें। दूरदराज और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों के लोगों को भी बेहतर उपचार उपलब्ध करवाने के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक उपचार की कई ऐसी सुविधाएं, जो पहले मुख्य रूप से महंगे निजी अस्पतालों में उपलब्ध होती थीं, अब सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में भी उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इसका लाभ विशेष रूप से आम लोगों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को मिल सकेगा।
320 अतिरिक्त पीजी सीटें बढ़ाने का प्रयास
मुख्यमंत्री ने चिकित्सा शिक्षा के विस्तार पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पहले 277 पीजी मेडिकल सीटें थीं और राज्य सरकार अब इसमें 320 अतिरिक्त सीटें बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने इस संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से सहयोग का आग्रह भी किया, ताकि प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता को और मजबूत किया जा सके।
पैरामेडिकल और अलाइड पाठ्यक्रमों पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में उत्तर भारत का पहला ऐसा कॉलेज शुरू किया गया है, जहां पैरामेडिकल और अलाइड स्वास्थ्य पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित और कुशल तकनीकी मानव संसाधन तैयार करना है।
उन्होंने बताया कि एम्स की तर्ज पर एक आयुर्वेदिक अस्पताल स्थापित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ स्वास्थ्य व्यवस्था को व्यापक रूप से मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है।
समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, सांसद हर्ष महाजन, विधायक रणधीर शर्मा, जीत राम कटवाल और त्रिलोक जम्वाल, एम्स अध्यक्ष एन.के. अरोड़ा, कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल दलजीत सिंह, स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंहमार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।